दिल्ली नगर निगम (MCD) के प्राथमिक विद्यालयों में अब किताबी शिक्षा के साथ बच्चों के नैतिक विकास और अच्छे संस्कारों पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। इसके लिए निगम की शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा ने महापौर प्रवेश वाही की सहमति से पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। बच्चों को अकादमिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों, अच्छे व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है। निगम के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
नैतिक शिक्षा पर तैयार होगी रूपरेखा
विशेषज्ञ समिति बच्चों के नैतिक विकास और उनमें अच्छे संस्कार विकसित करने से जुड़े पहलुओं पर विचार करेगी। समिति इस बात पर काम करेगी कि प्राथमिक स्तर से ही बच्चों में अनुशासन, जिम्मेदारी, आपसी सम्मान और सामाजिक व्यवहार जैसे गुणों को कैसे विकसित किया जा सकता है। MCD शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा ने महापौर की सहमति से इस समिति का गठन किया है।
शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा ने कहा कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। उनमें ईमानदारी, अनुशासन, विनम्रता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी जरूरी है। शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि बच्चों को बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी होना चाहिए।
नैतिक मूल्यों और अच्छे व्यवहार पर रहेगा जोर
इस पहल के तहत निगम के प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए मूल्यपरक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति इस बात पर सुझाव देगी कि स्कूली शिक्षा के दौरान बच्चों में अच्छे संस्कार, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारियों की समझ किस तरह विकसित की जाए। समिति इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगी, ताकि नैतिक शिक्षा को बच्चों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ा जा सके।
ईमानदारी, अनुशासन और विनम्रता सिखाने की तैयारी
योगेश वर्मा के मुताबिक, बचपन से ही बच्चों में अच्छे व्यवहार और नैतिक मूल्यों की नींव रखना जरूरी है। ईमानदारी, अनुशासन, विनम्रता, आपसी सम्मान और समाज के प्रति जिम्मेदारी जैसे गुण उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पांच सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य समिति में शामिल
समिति में शिक्षाविद एवं सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य गोविंद राम अग्रवाल, कुलदीप चौहान, इंद्रा शर्मा, विदुषी शर्मा और गजे सिंह को शामिल किया गया है। वहीं, शिक्षा विभाग के साथ समन्वय की जिम्मेदारी उप निदेशक अनिल कुमार को विभागीय समन्वयक के रूप में सौंपी गई है। मुख्यालय के शैक्षिक समन्वयक कुमार अखिलेश भी समिति को सहयोग देंगे।
ईमानदारी, अनुशासन और सहनशीलता विकसित करने पर जोर
विशेषज्ञ समिति बच्चों में ईमानदारी, अनुशासन, सहनशीलता और आत्मविश्वास जैसे गुण विकसित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों के सुझाव देगी। इसके साथ ही माता-पिता, बुजुर्गों और शिक्षकों के प्रति सम्मान, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, करुणा और आपसी सहयोग जैसे मूल्यों को स्कूल की नियमित गतिविधियों से जोड़ने पर काम किया जाएगा। बच्चों को सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने के उपाय भी कार्ययोजना का हिस्सा होंगे।
महापुरुषों की प्रेरक कहानियों से सिखाए जाएंगे संस्कार
समिति महापुरुषों के जीवन प्रसंगों, प्रेरक कहानियों और भारतीय संस्कृति पर आधारित शिक्षण सामग्री तैयार करने के सुझाव भी देगी। इसका उद्देश्य बच्चों को अपने देश की सांस्कृतिक विरासत और महान व्यक्तित्वों के जीवन मूल्यों से परिचित कराना है। इसके अलावा प्रार्थना सभा, बाल सभा, खेलकूद और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने के तरीके तलाशे जाएंगे। इन गतिविधियों को स्कूलों की नियमित दिनचर्या से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
एक महीने में देनी होगी विस्तृत रिपोर्ट
विशेषज्ञ समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट और सुझाव शिक्षा समिति के अध्यक्ष को सौंपने होंगे। रिपोर्ट मिलने के बाद निगम अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके बाद उपयुक्त प्रस्तावों को प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत MCD स्कूलों में लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
पांच सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य समिति में शामिल
समिति में शिक्षाविद एवं सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य गोविंद राम अग्रवाल, कुलदीप चौहान, इंद्रा शर्मा, विदुषी शर्मा और गजे सिंह को शामिल किया गया है। शिक्षा विभाग से समन्वय के लिए उप निदेशक अनिल कुमार को विभागीय समन्वयक बनाया गया है। वहीं, मुख्यालय के शैक्षिक समन्वयक कुमार अखिलेश समिति को सहयोग देंगे।
ईमानदारी, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी पर फोकस
समिति बच्चों में ईमानदारी, अनुशासन, सहनशीलता और आत्मविश्वास विकसित करने के लिए गतिविधियों के सुझाव देगी। इसके अलावा माता-पिता, बुजुर्गों और शिक्षकों का सम्मान, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, करुणा, आपसी सहयोग और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा जैसे मूल्यों को स्कूलों की नियमित गतिविधियों से जोड़ने पर काम किया जाएगा। महापुरुषों के जीवन प्रसंगों, प्रेरक कहानियों और भारतीय संस्कृति पर आधारित शिक्षण सामग्री तैयार करने के सुझाव भी दिए जाएंगे। प्रार्थना सभा, बाल सभा, खेलकूद और सामुदायिक गतिविधियों के जरिए बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने के उपाय तलाशे जाएंगे।
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