Indian Suicides in Gulf Countries: भारतीय बेहतर नौकरी के मौकों की तलाश में हर साल बड़ी संख्या में खाड़ी देशों में जाते हैं. विदेश मंत्रालय की तरफ से संसद में पेश किए गए हालिया आंकड़ों में खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय को लेकर चिंता को दर्शाया गया है. विदेश विभाग के आंकड़ों की मानें तो गल्‍फ कंट्रीज में वर्कप्‍लेस पर हर सप्‍ताह तीन भारतीयों की मौत हो जा रही है. बीते साल खाड़ी देशों में कई भारतीय प्रवासी मजदूरों ने आत्महत्या कर ली.

आंकड़ों के मुताबिक 2023 और 2025 के बीच खाड़ी देशों में 1,340 भारतीय नागरिकों ने मौत को गले लगाया है. आंकड़े बता रहे हैं कि विदेशों में रहे भारतीयों में सुसाइड के मामले पहले की तुलना में बढ़ चुके हैं.

विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में खाड़ी देशों में 511 मामले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में दर्ज किए गए हैं, उसके बाद सऊदी अरब में 354. आंकड़ों के अनुसार, साल 2023 से 2025 के बीच कार्यस्‍थल पर हुए एक्‍सीडेंट में 800 से ज्‍यादा भारतीयों की मौत हो चुकी है. 

विदेश मंत्रालय के मुताबिक 2023 और 2025 के बीच विदेश में 1900 भारतीय नागरिकों ने आत्महत्या की. इनमें से 1340 मौतें खाड़ी सहयोग परिषद देश में हुई हैं. एक अनुमान के तहत खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रह और काम कर रहे हैं. 

रिपोर्ट के मुताबिक कई प्रवासी मजदूर भर्ती, वीजा और यात्रा का खर्च उठाने के लिए कर्ज लेकर खाड़ी देशों में जाते हैं. फिर आर्थिक तनाव के कारण लिए हुए कर्ज को चुका नहीं पाते है.

एक मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना एनआरआई माइग्रेंट्स एसोसिएशन का कहना है कि लगातार हो रही इन मौतों के पीछे कई कारण हो सकते है, जैसे सुरक्षा उपकरणों का पर्याप्त उपयोग न होना, कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन न किया जाना, औद्योगिक इकाइयों में तकनीकी खामियां तथा श्रमिकों को पर्याप्त कौशल और ट्रेनिंग न मिलना.

कुछ रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि 12 घंटे तक की लंबी शिफ्ट, न के बराबर आराम करना, परिवारों से दूर रहने की चिंता भी काफी मानसिक दबाव डाल सकती है.

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