हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में इस साल मानसून की बेरुखी के कारण आने वाले महीनों में गंभीर जलसंकट की स्थिति पैदा हो सकती है। सामान्य से करीब 14 इंच कम बारिश होने के कारण शहर की जल आपूर्ति का मुख्य जरिया माने जाने वाले तालाब अपनी पूरी क्षमता से नहीं भर पाए हैं। हालात से निपटने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं।
तालाबों की स्थिति और पानी की किल्लत
तालाबों का कम भरना: कम बारिश के कारण शहर के प्रसिद्ध यशवंत सागर और बिलावली तालाब पूरी तरह नहीं भर सके हैं। स्थिति को संभालते हुए अब नवंबर से अप्रैल के बीच नर्मदा के पानी से इन दोनों तालाबों को दो बार भरे जाने की योजना है।जलस्तर कम होने के कारण आने वाले दिसंबर-जनवरी महीने से ही शहर के कई इलाकों में पानी की किल्लत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासन के कड़े कदम
आगामी गर्मी के दिनों में पानी की समस्या से उबरने के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन ने कई स्तरों पर कार्ययोजना तैयार की है। भूजल स्तर को और गिरने से बचाने के लिए शहर में नए बोरिंग के निर्माण पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी की जा रही है, जिसके लिए नगर निगम जल्द ही जिला प्रशासन को प्रस्ताव भेजेगा। पिछले साल जहां गर्मी के दिनों में 700 से अधिक टैंकरों से पानी पहुंचाया गया था, वहीं इस बार स्थिति को देखते हुए 800 से ज्यादा पानी के टैंकर चलाने की तैयारी की जा रही है।
बर्बादी पर लगाम और ट्रीटेड वाटर का उपयोग
पाइपलाइन के लीकेज को तुरंत दुरुस्त करने और पानी की बर्बादी रोकने पर विशेष फोकस रहेगा। इसके साथ ही, शहर में चल रहे बड़े निर्माण कार्यों (Construction Works) में पीने के पानी के बजाय केवल ट्रीटेड वाटर (Treated Water) के इस्तेमाल को अनिवार्य रूप से बढ़ावा देने की योजना है। प्रशासन के इन शुरुआती प्रयासों के बीच अब यह देखना अहम होगा कि सर्दियों और गर्मियों के दौरान शहरवासियों को कितनी राहत मिल पाती है।
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