हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर की सड़कों पर दौड़ने वाले नगर निगम के वाहनों को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद अब निगम प्रशासन ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब नगर निगम का कोई भी ड्राइवर ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट पास किए बिना वाहन नहीं चला सकेगा। यदि जांच में शराब पीने की पुष्टि होती है तो ड्राइवर को गाड़ी की चाबी नहीं दी जाएगी और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
नगर निगम का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पिछले कुछ समय से निगम के कुछ ड्राइवरों के शराब के नशे में वाहन चलाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें कथित तौर पर ड्राइवरों के नशे में ड्यूटी करने के आरोप लगे थे। इन शिकायतों ने न सिर्फ निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए बल्कि शहरवासियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी।
हर सुबह होगी जांच, फिर मिलेगी चाबी
नई व्यवस्था के तहत अब हर ड्राइवर को ड्यूटी शुरू करने से पहले ब्रीथ एनालाइजर मशीन से जांच करानी होगी। जांच रिपोर्ट सामान्य आने पर ही उसे वाहन की चाबी सौंपी जाएगी। यदि किसी ड्राइवर में शराब की पुष्टि होती है तो उसे वाहन चलाने की अनुमति नहीं मिलेगी और उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा और सफाई व्यवस्था से जुड़े वाहनों का संचालन अधिक सुरक्षित तरीके से हो सकेगा।
1400 वाहन, 2500 ड्राइवर… अब सभी पर रहेगी नजर
इंदौर नगर निगम के पास सफाई, कचरा परिवहन और अन्य कार्यों के लिए करीब 1400 वाहन हैं। इन वाहनों को चलाने के लिए लगभग 2500 ड्राइवर तैनात हैं। हर दिन बड़ी संख्या में ये वाहन सुबह से ही शहर की सड़कों पर उतरते हैं। ऐसे में किसी भी चालक की लापरवाही या नशे की हालत में वाहन चलाना आम नागरिकों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
इसी जोखिम को देखते हुए निगम प्रशासन ने सभी ड्राइवरों को नियमित जांच के दायरे में लाने का निर्णय लिया है।
शिकायतों के बाद जागा प्रशासन
नगर निगम को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ चालक शराब के नशे में वाहन चला रहे हैं। कई मामलों में स्थानीय लोगों ने भी इस तरह की शिकायतें की थीं। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने पूरी व्यवस्था की समीक्षा की और अब जांच को अनिवार्य कर दिया है।
सुरक्षा के साथ जवाबदेही भी बढ़ेगी
नगर निगम का मानना है कि यह कदम केवल अनुशासन लागू करने के लिए नहीं, बल्कि ड्राइवरों और आम नागरिकों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। नियमित जांच से यह भी तय होगा कि ड्यूटी के दौरान कोई चालक नशे की हालत में वाहन लेकर सड़क पर न उतरे।
अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर निगम की यह नई व्यवस्था सिर्फ आदेशों तक सीमित रहती है या वास्तव में रोजाना सख्ती से लागू होती है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू हुई तो शहर की सड़कों पर नगर निगम के वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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