हेमंत शर्मा, इंदौर। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भगवा ध्वजों की लहर और चारों ओर गूंजता ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष… इंदौर की सड़कें मानो शिवभक्ति के रंग में रंग गईं। नीलकंठेश्वर महादेव की यात्रा में 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। इसमें बुजुर्गों से लेकर युवा और Gen Z तक बड़ी संख्या में शामिल हुए। यह सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और नई पीढ़ी के जुड़ाव का ऐसा दृश्य रहा, जिसने शहर में भक्ति का अलग ही माहौल बना दिया।

17 साल पहले उद्योगपति सूरज रजक ने लिया था संकल्प

नीलकंठेश्वर महादेव यात्रा की शुरुआत करीब 17 साल पहले उद्योगपति सूरज रजक के संकल्प से हुई थी। छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह धार्मिक आयोजन आज हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है। विधायक गोलू शुक्ला के नेतृत्व में निकली यात्रा में बड़ी संख्या में युवा भी नजर आए। हाथों में भगवा ध्वज और जुबां पर महादेव का नाम लिए युवा पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए।

इंदौर में दिखा केदारनाथ धाम का दिव्य स्वरूप

इस बार यात्रा में भगवान केदारनाथ धाम की तर्ज पर तैयार की गई भव्य झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। केदारनाथ मंदिर के स्वरूप ने भक्तों को ऐसा एहसास कराया, जैसे बाबा केदार की छवि मालवा की धरती पर ही साकार हो गई हो। झांकी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आया। कई श्रद्धालु हाथ जोड़कर भगवान शिव का स्मरण करते दिखाई दिए। आसमान में उभरा शिव का विराट स्वरूप, ड्रोन शो ने बांधा समांपरंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम भी यात्रा में देखने को मिला। रात के आसमान में ड्रोन शो के जरिए भगवान शिव के अलग-अलग दिव्य स्वरूप प्रदर्शित किए गए। आसमान में बनते शिव के विशाल रूप को देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध नजर आए। हजारों लोगों ने इस अद्भुत दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद किया।

उज्जैन नहीं पहुंच सके तो इंदौर में मिला महाकाल की सवारी जैसा अहसास

मालवा में भगवान महाकाल की सवारी की अपनी विशेष धार्मिक मान्यता है। ऐसे में जो श्रद्धालु उज्जैन नहीं पहुंच पाते, उनके लिए नीलकंठेश्वर महादेव की यह यात्रा भक्ति और दर्शन का बड़ा अवसर बनकर सामने आई। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सड़क से लेकर घरों की छतों तक लोग महादेव की सवारी के दर्शन के लिए नजर आए।

आस्था की डोर से जुड़ती नई पीढ़ी

सबसे खास बात यह रही कि यात्रा में युवाओं और Gen Z की भागीदारी भी बड़ी संख्या में दिखाई दी। डिजिटल दौर में पली-बढ़ी नई पीढ़ी जब भगवा ध्वज हाथ में लेकर ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष करती नजर आई, तो यह धार्मिक परंपराओं के बदलते स्वरूप की तस्वीर भी बनी। 17 साल पहले उद्योगपति सूरज रजक ने जिस संकल्प का बीज रोपा था, वह आज हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का विशाल स्वरूप बन चुका है। नीलकंठेश्वर महादेव की यात्रा ने एक बार फिर संदेश दिया कि आस्था की जड़ें गहरी हों तो पीढ़ियां बदल सकती हैं, लेकिन भक्ति की लौ कभी बुझती नहीं।

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