हेमंत शर्मा, इंदौर। बहुचर्चित प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की और पूछा कि आखिर अब तक आश्रम की संचालिका के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं की गई? इसके साथ ही अदालत ने भवन आवंटन, प्रशासनिक जवाबदेही और आपराधिक कार्रवाई को लेकर सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है।
हाईकोर्ट ने सरकार से मांगे कई तीखे सवाल
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने सरकार से पूछा- यदि वृद्धाश्रम के लिए भवन उपलब्ध कराया गया था, तो उससे संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड कहां हैं? इतने गंभीर मामले के बाद भी संचालिका के विरुद्ध आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने में देरी क्यों हुई?
नगर निगम का बड़ा एक्शन
सरकारी जमीन से हटाया कब्जा हाईकोर्ट की सख्ती के बीच नगर निगम की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम को खाली करा लिया है। निगम ने सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जे को मुक्त कराते हुए अवैध रूप से खड़ी की गई दीवार को ध्वस्त कर दिया और पूरे परिसर को दोबारा अपने कब्जे में ले लिया। इसके अलावा, परिसर के भीतर अवैध रूप से संचालित हो रही गोशाला को भी हटाने का नोटिस जारी कर दिया गया है। प्रशासन ने आसपास के अन्य अवैध कब्जों की जांच भी शुरू कर दी है।
बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया
प्रशासनिक अधिकारियों ने दावा किया है कि वृद्धाश्रम को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। आश्रम में रह रहे सभी बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित (शिफ्ट) कर दिया गया है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक जांच जारी है।

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