पटना। ​राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के पोते और तेजस्वी यादव के सुपुत्र इराज लालू यादव का आज पहला जन्मदिन है। यह खास मौका न केवल एक पारिवारिक उत्सव है बल्कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र भी बन गया है। इस भव्य आयोजन के लिए दिल्ली-एनसीआर का रुख करते हुए लालू परिवार पहले ही गाजियाबाद स्थित रागिनी विला पहुंच चुका है। यह आवास लालू यादव की बेटी रागिनी और दामाद राहुल यादव का है जहां इस समारोह की भव्य तैयारियां की गई हैं।

​विपक्ष का जमावड़ा और राजनीतिक संदेश

​राजद प्रवक्ता शक्ति यादव के अनुसार इराज की बुआ रागिनी इस जन्मदिन की मेजबानी कर रही हैं। लेकिन इस कार्यक्रम का महत्व केवल पारिवारिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी है। सूत्रों के मुताबिक विपक्ष के कई कद्दावर नेताओं को निमंत्रण भेजा गया है। इनमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे बड़े नाम शामिल हैं। चर्चाएं तो बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आने की भी हैं।
​विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजद को मिली करारी हार के बाद लालू यादव इस मंच के जरिए विपक्षी एकजुटता का संदेश देना चाहते हैं। इस आयोजन के माध्यम से वे यह दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं कि तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद बिहार की राजनीति में उनकी पकड़ और प्रभाव अब भी अक्षुण्ण है।

​तेज प्रताप और रोहिणी आचार्य पर सबकी नजरें

​इस जन्मदिन समारोह में सबसे ज्यादा उत्सुकता तेज प्रताप यादव और रोहिणी आचार्य की उपस्थिति को लेकर है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से लालू परिवार के भीतर आंतरिक कलह की खबरें सुर्खियां बटोरती रही हैं। तेज प्रताप का पार्टी और परिवार से अलग होकर अपनी राह चुनना हो या चुनाव के बाद रोहिणी आचार्य का तीखा रुख परिवार में दूरियां स्पष्ट दिखाई दी थीं।
​हालांकि खबरों के अनुसार लालू यादव ने व्यक्तिगत रूप से फोन कर दोनों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया है। अब सियासी हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या इराज का पहला जन्मदिन परिवार के बिखरे रिश्तों में फिर से मिठास घोल पाएगा या फिर राजनीतिक विरासत की खींचतान इन पारिवारिक तस्वीरों में भी नजर आएगी।
​पटना एयरपोर्ट पर रोहिणी आचार्य के हालिया बयानों ने जिस तरह परिवार के भीतर की दरार को सार्वजनिक किया था उसके बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आज की रात लालू परिवार फिर से एकजुट नजर आएगा। यह आयोजन स्पष्ट करेगा कि लालू यादव अपने परिवार को एक सूत्र में पिरोकर अपनी सियासी विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे या नहीं।