ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने एक बार फिर बातचीत के जरिए युद्ध खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। ईरान ने मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका तक अपनी शर्तें पहुंचाई हैं। तेहरान का कहना है कि इन शर्तों पर सहमति बनने की स्थिति में वह अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है।
ईरान की बातचीत के लिए क्या हैं शर्तें?
ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने शनिवार (19 सितंबर) को अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में बताया कि तेहरान ने मध्यस्थ देशों को अपनी मांगों से अवगत करा दिया है। इनमें मुख्य रूप से:
- सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य कार्रवाई का अंत
- विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड को रिलीज करना
- ईरान पर लागू नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना
रेजाई के मुताबिक, कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी है। अब ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है।
अमेरिकी हमले की आशंका, ईरान की कड़ी चेतावनी
बातचीत की पहल के बीच ईरान ने अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। रविवार को ईरानी सरकारी मीडिया ने देश की केंद्रीय सैन्य कमान के हवाले से दावा किया कि तेहरान को ऐसी जानकारी मिली है कि अमेरिका कुछ क्षेत्रीय देशों के समर्थन से ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
ईरानी सेना ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका हमला करता है तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हितों को लगातार निशाना बनाया जाएगा। ईरान ने उन क्षेत्रीय देशों को भी संघर्ष में शामिल पक्ष मानने की बात कही है, जो अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का समर्थन करेंगे।
दूसरे क्षेत्रीय संघर्षों में भी मध्यस्थता की पेशकश
मोहसिन रेजाई ने कहा कि ईरान सऊदी अरब और यमन के बीच संघर्ष खत्म कराने में मदद करना चाहता है। इसके अलावा तेहरान अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव को कम करने और दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष को समाप्त कराने में भी भूमिका निभाने की इच्छा रखता है। इस घटनाक्रम से एक ओर ईरान-अमेरिका बातचीत की संभावित राह खुलती दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर सैन्य टकराव की आशंका के बीच क्षेत्रीय तनाव भी बना हुआ है।
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