नई दिल्ली। अमृतसर से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित लाहौर दशकों तक इस्लामीकरण की गिरफ्त में रहने के बाद अब अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है. पिछले दो महीनों में लाहौर में इस्लामी नामों वाली 9 जगहों को उनके मूल हिंदू या ब्रिटिश विरासत वाले नाम वापस दे दिए गए हैं.

बदलाव के दौर में इस्लामपुरा को अब आधिकारिक तौर पर उसके पुराने नाम कृष्णानगर से जाना जाएगा और बाबरी मस्जिद चौक को अब आधिकारिक तौर पर ‘पुराना जैन मंदिर चौक’ के नाम से जाना जाएगा. इनके बोर्ड भी लगा दिए गए हैं. खास बात यह है कि इन बदलावों के खिलाफ वहां कोई कट्टरपंथी मोर्चा नहीं खुला.

पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के अनुसार, लाहौर के परकोटा शहर के सभी आठ दरवाजों का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा, जिसमें दिल्ली गेट भी शामिल है. सूत्रों के अनुसार, नाम बदलने के दूसरे चरण में, पाकिस्तान के सिंध और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में भी मूल नामों की घोषणा की जा सकती है.

‘लक्ष्मी चौक विरासत का हिस्सा’

लाहौर में बीकनहाउस यूनिवर्सिटी के लेक्चरर साद मलिक कहते हैं, “यह सचमुच एक सुखद बदलाव है. मैं हमेशा इसे लक्ष्मी चौक ही कहता था, क्योंकि मेरे पिता भी इसे इसी नाम से पुकारते थे.” साद कहते हैं कि नगर निगम ने भले ही अपने कागजों में इसका नाम मौलाना जफर अली चौक रख दिया हो, लेकिन मेरे और मेरे जैसे कई लोगों के लिए, लक्ष्मी चौक उस विरासत का हिस्सा है, जिसका जफर अली खान के नाम से कोई लेना-देना नहीं है. लक्ष्मी चौक पीढ़ियों से जुड़ा एक नाम है.

जैन मंदिर

जैन मंदिर के पास अनारकली इलाके के मौलाना वाजिद कादरी का मानना ​​है कि इस्लाम को किसी भी मंदिर या गुरुद्वारे से कोई दिक्कत नहीं है. 1990 के दशक में, जैन मंदिर चौक का नाम बदलकर बाबरी मस्जिद चौक कर दिया गया था. यह एक राजनीतिक फैसला था. हमने इसे कभी बाबरी मस्जिद चौक नहीं कहा. हमें यह समझना होगा कि जिन पूर्वजों ने ये हिंदू नाम रखे थे, वे भी मुसलमान ही थे, और इससे उनके विश्वास पर कोई असर नहीं पड़ा था.

नाम बदलने की शुरुआत कब हुई?

पाकिस्तान के पूर्व PM नवाज़ शरीफ़ और पंजाब की CM मरियम नवाज़ ने 19 मार्च को एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई. इसमें लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल (LHAR) प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई. यह फ़ैसला किया गया कि लाहौर के इलाकों के नाम पुराने हिंदू या ब्रिटिश विरासत काल के नामों पर रखे जाएँगे.

नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि हमें यूरोप से सीखना चाहिए. वे ऐतिहासिक नामों से छेड़छाड़ नहीं करते. लाहौर के पुराने नाम हमारे इतिहास का हिस्सा हैं; हमें उन्हें बचाना है, बदलना नहीं. मरियम ने कहा कि लाहौर का इतिहास ही उसकी पहचान है. पुराने नाम और इमारतें इसका सबूत हैं.

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