पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में लगातार बढ़ती हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर ब्रिटेन की संसद में गंभीर चिंता जताई गई है। कश्मीर पर बनी ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (APPG) के चेयरमैन इमरान हुसैन के नेतृत्व में 50 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने यूके के विदेश सचिव को पत्र लिखकर हालात पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सांसदों ने कहा कि क्षेत्र में गोलीबारी, मौतों और बढ़ते तनाव की खबरें बेहद चिंताजनक हैं।
ब्रिटिश सरकार से कूटनीतिक पहल की अपील
सांसदों ने अपने पत्र में कहा कि ब्रिटेन में रहने वाले कई कश्मीरी परिवार अपने रिश्तेदारों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत बढ़ाने और क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। उनका मानना है कि संवाद के जरिए हालात को सामान्य बनाया जा सकता है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने उठाए सवाल
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी रावलाकोट में क्षेत्रीय चुनाव के पहले दिन हुई हिंसा पर पाकिस्तान सरकार से जवाब मांगा है। संस्था की कार्यवाहक दक्षिण एशिया निदेशक इसाबेल लासी ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद होने के कारण घटनाओं की सही जानकारी सामने आने में मुश्किल हो रही है। एमनेस्टी ने जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर लगाए गए प्रतिबंध को भी तनाव बढ़ने का प्रमुख कारण बताया।
40 से अधिक लोगों की मौत का दावा
27 जुलाई को रावलाकोट और कोटली में हिंसा भड़क उठी थी। कोटली में विरोधी राजनीतिक गुटों के बीच हुई झड़प में एक कार्यकर्ता की मौत हो गई। वहीं, JAAC का दावा है कि सुरक्षा बलों की फायरिंग में 19 लोगों की जान गई और कई अन्य घायल हुए। पुलिस के अनुसार, इस दौरान उसके दो जवान भी घायल हुए। उल्लेखनीय है कि 5 जून को JAAC पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बाद से अब तक विभिन्न हिंसक घटनाओं में प्रदर्शनकारियों, पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों सहित 40 से अधिक लोगों की मौत होने की खबर है।
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