Jaipur Mayor Election 2026: जयपुर को 25 सितंबर को नया महापौर मिलेगा, लेकिन उससे पहले चुनाव का असली खेल अब पार्षदों के वोटों पर टिक गया है। शनिवार को महापौर पद के लिए चार नामांकन दाखिल हुए। भाजपा से सुनील कोठारी, कांग्रेस से सुनीता मावर, कांग्रेस की सुनीता मैठी और निर्दलीय पार्षद दशरथ अटल ने पर्चा भरा। 150 सदस्यीय निगम में भाजपा के 78 और कांग्रेस के 57 पार्षद हैं। ऐसे में भाजपा के पास बहुमत का आंकड़ा है, लेकिन कांग्रेस के 20 भाजपा पार्षदों के संपर्क में होने के दावे और 2019 की क्रॉस वोटिंग का इतिहास चुनाव को दिलचस्प बना रहा है।

2019 की वो घटना, जिसे BJP इस बार दोहराना नहीं चाहती
जयपुर महापौर चुनाव में क्रॉस वोटिंग का इतिहास भाजपा के लिए सबसे बड़ा संदर्भ बना हुआ है। 2019 में बहुमत होने के बावजूद भाजपा के मनोज भारद्वाज चुनाव हार गए थे और विष्णु लाटा महापौर चुने गए थे। यही वजह है कि इस बार प्रत्याशी चयन से लेकर नामांकन तक भाजपा ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने पर जोर दिया। सुनील कोठारी के नामांकन के दौरान पार्टी के प्रमुख दावेदार रहे शैलेंद्र भार्गव, पुनीत कर्णावट और विमल अग्रवाल की मौजूदगी भी इसी संदेश के तौर पर देखी गई।
कोठारी के साथ पूरी टीम दिखी
सुनील कोठारी ने शनिवार को नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर नामांकन दाखिल किया। उनके साथ प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी, सांसद मंजू शर्मा, विधायक कालीचरण सराफ और बालमुकुंद आचार्य समेत भाजपा के कई नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। नामांकन के दौरान पूर्व दावेदार पुनीत कर्णावट और विमल अग्रवाल की मौजूदगी ने भी पार्टी की ओर से एकजुटता का संदेश दिया। कर्णावट ने कहा कि कोठारी का नाम सर्वसम्मति से तय हुआ है और पार्टी के पास निर्दलीय पार्षदों का भी समर्थन है।
कोठारी का दावा, संख्या से ज्यादा वोट मिलेंगे
नामांकन के बाद सुनील कोठारी ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि भाजपा के पार्षदों के अलावा कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों का भी समर्थन मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि उन्हें भाजपा के पार्षदों की संख्या से भी ज्यादा वोट मिलेंगे। कोठारी ने जयपुर की सफाई व्यवस्था सुधारने और शहर के गौरव को फिर स्थापित करने को अपनी प्राथमिकताओं में बताया।
कांग्रेस ने खोला 20 भाजपा पार्षदों वाला कार्ड
भाजपा की एकजुटता के दावों के बीच कांग्रेस ने अलग तस्वीर पेश की है। कांग्रेस शहर अध्यक्ष सुनील शर्मा ने दावा किया कि भाजपा के 20 पार्षद कांग्रेस के संपर्क में हैं। उन्होंने भाजपा की पार्षद बाड़ाबंदी पर भी सवाल उठाया। कांग्रेस का कहना है कि अगर भाजपा को क्रॉस वोटिंग की चिंता नहीं है तो पार्षदों को एक साथ रखने की जरूरत क्यों पड़ी। हालांकि भाजपा ने कांग्रेस के इस दावे को लेकर अपनी ओर से कोई स्वीकारोक्ति नहीं की है।
सुनीता मावर बोलीं, आंकड़ों से ज्यादा मुद्दे मायने रखते हैं
कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुनीता मावर ने कहा कि वह आंकड़ों के खेल में नहीं उलझना चाहतीं। उनका कहना है कि पार्षदों ने चुनाव प्रचार के दौरान जयपुर की गलियों और मोहल्लों की स्थिति देखी है। मावर ने सफाई व्यवस्था, कचरे, आवारा पशुओं और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि जयपुर की पहचान और विश्व विरासत शहर के दर्जे को बनाए रखने के लिए व्यवस्थाओं में सुधार जरूरी है।
25 सितंबर को सिर्फ मेयर नहीं, दावों की भी परीक्षा
अब मुकाबला नामांकन से आगे बढ़कर पार्षदों की गोलबंदी पर आ गया है। भाजपा के पास निगम में 78 पार्षद हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 76 है। कांग्रेस के पास 57 पार्षद हैं। ऐसे में 25 सितंबर का मतदान यह साफ करेगा कि पार्टियों के दावे कितने वोटों में बदलते हैं। खास नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा अपने पार्षदों को एकजुट रख पाती है या नहीं और कांग्रेस अपने बताए राजनीतिक संपर्कों को वोट में बदल पाती है।
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