Dharm Desk – प्राचीन भारतीय परंपरा में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन अनन्त चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। यह पावन अवसर सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु के अनन्त रूप की आराधना और उनकी असीम आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए समर्पित है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और पूजा-अर्चना के बाद अपनी कलाई पर विशेष अनन्त सूत्र अनन्ता धारण करते हैं। अनन्त चतुर्दशी का पावन पर्व 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना और अनन्त सूत्र धारण करने के साथ-साथ दस दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का समापन भी होता है और गणपति विसर्जन किया जाता है।

14 गांठें देती हैं 14 लोकों का प्रतीकात्मक संदेश
अनन्त सूत्र में धागे रेशम या कुशा का उपयोग किया जाता है जिसमें कुल चौदह गांठें लगाई जाती हैं। ये चौदह गांठें भगवान श्री हरि विष्णु के चौदह भुवनों या लोकों भूः, भुवः, स्व, महः, जनः, तपः, सत्यम्, अतल, वितल, सुतल, रसातल, तलातल, महातल और पाताल का प्रतीक होती हैं।
रामचरितमानस के सुंदरकांड में भी उल्लिखित चौपाई ‘चौदह भुवन एक पति होई’ इसी बात की ओर इशारा करती है कि इन सभी लोकों के स्वामी केवल एकमात्र ईश्वर हैं। परंपरा के अनुसार विधि-विधान से चौदह गांठों वाला अनन्ता धारण करने से भक्त की सभी चौदह लोकों में रक्षा होती है।
अनंत सूत्र धारण करने का महत्व और मिलने वाले शुभ फल
भगवान विष्णु अनंत हैं जिनकी महिमा का कोई पार नहीं है, ‘हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता’। अनन्त सूत्र को बाजू या कलाई पर एक रक्षा-कवच के रूप में बांधा जाता है। यह धागा शक्ति, सुरक्षा, आस्था और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। इसे धारण करने से साधक को भगवान विष्णु का अखंड आशीर्वाद प्राप्त होता है।जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि तथा कल्याणकारी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
अनंत सूत्र धारण करने का सही तरीका
1.पूजन सामग्री
कुशा, रेशम या सूती धागे को हल्दी में रंगकर उसमें 14 गांठें लगाएं।
2.पूजा विधान
अनन्त चतुर्दशी के दिन प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें। फिर भगवान विष्णु के अनन्त रूप का ध्यान करते हुए उन्हें फल, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
3.मंत्र एवं समर्पण
मंत्रों का जाप करते हुए अनन्त सूत्र को भगवान विष्णु के चरणों में समर्पित करें।
4.पुरुषों को इसे अपने दाएं हाथ की बाजू,कलाई पर तथा महिलाओं को बाएं हाथ की बाजू,कलाई पर बांधना चाहिए।



