Dharm Desk:- शुक्र ग्रह को प्रेम, विवाह, दांपत्य जीवन, सौंदर्य, कला, सुख-सुविधा और भौतिक वैभव से जोड़कर देखा जाता है । ऐसे में शुक्र के अस्त होने की अवधि को इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। 23 सितंबर की रात करीब 8:16 बजे शुक्र अस्त होंगे और 30 अक्टूबर को दोबारा उदय होंगे। यानी करीब 37 दिनों तक शुक्र अस्त अवस्था में रहेंगे। शुक्र के अस्त होने की अवधि में उनकी ज्योतिषीय शक्ति कमजोर मानी जाती है। इस दौरान विशेष रूप से विवाह और मांगलिक कार्यों को लेकर सावधानी बरतने की बात की मान्यता है। विवाह, सगाई और अन्य शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त निकालते समय शुक्र की स्थिति को भी देखा जाता है। इसलिए इस अवधि में शुभ कार्यों की योजना बनाने वाले लोगों के लिए शुक्र की स्थिति महत्वपूर्ण हो जाती है।

विवाह और मांगलिक कार्यों पर क्या असर?
ज्योतिष में शुक्र को विवाह और दांपत्य सुख का कारक ग्रह माना गया है। शुक्र अस्त होने पर विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त को लेकर विशेष विचार किया जाता है । हालांकि हर कार्य पर एक जैसा प्रभाव नहीं माना जाता। किसी भी शुभ आयोजन के लिए स्थानीय पंचांग और कुंडली के अनुसार मुहूर्त देखना उचित होता है।
विशेष ध्यान प्रेम और दांपत्य जीवन में रखें
शुक्र का संबंध प्रेम और रिश्तों से सीधा है। ऐसे में इस अवधि में पति-पत्नी के बीच छोटी बातों को लेकर मत-भेद बढ़ने की आशंका बताई जाती है। प्रेम संबंधों में भी गलतफहमी या भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए रिश्तों में संवाद बनाए रखना और जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेना बेहतर नहीं रहेगा।
इन 4 राशियों पर दिख सकता है असर
शुक्र अस्त की अवधि में वृषभ, तुला, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को प्रेम, धन और रिश्तों से जुड़े मामलों में विशेष साव धानी बरतने की सलाह दी जा रही है। खर्च बढ़ने, रिश्तों में तनाव या योजनाओं में रुकावट जैसी स्थितियां सामने आ सकती हैं। हालांकि कुंडली में शुक्र की स्थिति और अन्य ग्रहों के प्रभाव के आधार पर परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।
शुक्र उदय के बाद क्या बदलेगा?
30 अक्टूबर को शुक्र के उदय होने के बाद शुक्र से जुड़े कार्यों के लिए स्थिति में बदलाव माना जाएगा। विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त देखते समय शुक्र की उदय अवस्था को भी ध्यान में रखा जाएगा।



