जमुई/विजय कुमार। जमुई शहर के व्यस्ततम इलाके पंचमंदिर के पास उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब चार छोटे बच्चों को लावारिस हालत में भटकते हुए देखा गया। बच्चे न तो अपना नाम बता पा रहे थे और न ही अपने घर का सही पता, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। लेकिन, स्थानीय नागरिकों की संवेदनशीलता और डायल 112 की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया।
क्या था पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार ये चारों बच्चे जमुई के कल्याणपुर इलाके के रहने वाले हैं। दोपहर के समय वे घर के बाहर खेल रहे थे तभी खेल-खेल में वे रास्ता भटक गए। आगे बढ़ते-बढ़ते वे शहर के मुख्य बाजार स्थित पंचमंदिर तक पहुंच गए। यहां जब राहगीरों ने बच्चों को अकेला और डरा हुआ देखा तो उनसे पूछताछ की। मासूम होने के कारण बच्चे घबरा गए और बार-बार अपना नाम और पता बदलते रहे, जिससे उनकी स्थिति और भी संदिग्ध हो गई।
स्थानीय लोगों की सतर्कता और पुलिस की भूमिका
बच्चों की ऐसी हालत देख स्थानीय लोगों ने समझदारी दिखाई और तुरंत डायल 112 पर सूचना दी। कॉल मिलते ही पुलिस टीम पलक झपकते ही मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने बड़े ही प्रेमपूर्वक बच्चों को अपने संरक्षण में लिया और उन्हें सुरक्षित टाउन थाना ले आए।
थाना परिसर में बच्चों को खाना खिलाया गया और उन्हें शांत कराने के प्रयास किए गए। इसी बीच, कल्याणपुर स्थित उनके घरों में कोहराम मचा हुआ था। परिजन अपने जिगर के टुकड़ों को हर तरफ खोज रहे थे। जब उन्हें सूचना मिली कि उनके बच्चे टाउन थाना में सुरक्षित हैं तो उनकी जान में जान आई।
मिलन के बाद भावुक हुए परिजन
थाने पहुंचे परिजनों ने जब अपने बच्चों को सकुशल देखा तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। पुलिस ने आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं और पहचान का सत्यापन पूरा करने के बाद चारों बच्चों को उनके अभिभावकों को सौंप दिया। परिजनों ने स्थानीय लोगों की सतर्कता और डायल 112 की टीम का हृदय से आभार प्रकट किया।
इस घटना के बाद जमुई पुलिस ने सभी अभिभावकों के लिए एक विशेष अपील जारी की है। पुलिस ने कहा कि बच्चों पर विशेष नजर रखें और छोटे बच्चों को कभी भी अकेला घर से बाहर न जाने दें। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सजग नागरिक और सक्रिय पुलिस बल ही समाज की सबसे बड़ी सुरक्षा कवच है।

