अजय सैनी, भिवानी. दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ हुए घटनाक्रम के विरोध में मंगलवार को भिवानी में छात्रों, युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर तिरंगा मार्च निकाला। यह मार्च चिडिय़ाघर रोड स्थित चंद्रशेखर चौक से प्रारंभ होकर लघु सचिवालय तक पहुंचा। मार्च के दौरान हाथों में तिरंगा लिए विद्यार्थियों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखते हुए छात्रों के सम्मान, लोकतांत्रिक अधिकारों एवं न्याय की मांग को बुलंद किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री व केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई।

मार्च के उपरांत पूर्व छात्र नेता एवं समाजसेवी उमेश भारद्वाज तथा छात्र नेता मंजीत लांगयान दिल्ली में आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक दल या संगठन का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के सम्मान, अधिकार, भविष्य और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संघर्ष है। उमेश भारद्वाज ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है। यदि अपने भविष्य और शिक्षा को लेकर आवाज़ उठाने वाले छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया जाता है, तो यह पूरे छात्र समाज को आहत करता है। लोकतंत्र में किसी भी समस्या का समाधान संवाद, संवेदनशीलता और न्याय से होना चाहिए, न कि छात्रों की आवाज़ को दबाकर।

छात्र नेता मंजीत लांगयान ने कहा कि आज देश का युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार से जुड़े अनेक मुद्दों पर छात्र लगातार अपनी बात रख रहे हैं। ऐसे समय में यदि छात्रों की आवाज़ को गंभीरता से सुनने के बजाय उन्हें निराश किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर लंबे समय से लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का प्रतीक रहा है और वहां अपनी बात रखने पहुँचे छात्रों के साथ हुए घटनाक्रम ने देशभर के विद्यार्थियों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि भिवानी के छात्र दिल्ली में आंदोलनरत छात्रों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। यह भूख हड़ताल केवल समर्थन का प्रतीक नहीं, बल्कि इस बात का संकल्प है कि छात्रों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से निरंतर जारी रहेगी।

दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, अहिंसात्मक एवं संविधान की मर्यादाओं के अनुरूप रहेगा। उन्होंने सभी छात्रों से अनुशासन बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की अफवाह या उकसावे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संयम और एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्र किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। यदि उनकी समस्याओं को समय रहते सुना और सुलझाया जाए तो वही युवा देश के विकास में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए छात्रों की न्यायपूर्ण मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर उचित समाधान निकाला जाना चाहिए।

अंत में उमेश भारद्वाज एवं मंजीत लांगयान ने कहा कि जब तक छात्रों की आवाज़ को उचित सम्मान नहीं मिलता और उनकी मांगों पर न्यायपूर्ण निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका नैतिक समर्थन और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने समाज के सभी वर्गों, शिक्षकों, अभिभावकों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों एवं मीडिया से छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज़ को मजबूती देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से एडवोकेट सुनीता गोलपुरिया, महेंद्र बिंदनोई, आयुष बापोड़ा, साहिल वालिया, दीपक गुलिया, आशीष बवानी, इरफान खान, संदीप, आर.के., कविता, पूजा, संजना, अंजलि, अक्षिता, अक्षरा, सुनीता सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, युवा साथी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में छात्रों की एकजुटता, लोकतांत्रिक अधिकारों और न्याय के समर्थन का संकल्प दोहराया।