० छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा का राज्यव्यापी बंद, कई जिलों में प्रदर्शन और सड़क जाम
रांची। JPSC-JSSC नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों पर विधानसभा घेराव के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा ने मंगलवार को झारखंड बंद का आह्वान किया है। बंद का असर राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिलों में देखने को मिल रहा है। गिरिडीह में सुबह से ही भाजपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
गिरिडीह में बंद का व्यापक असर
गिरिडीह में बंद का व्यापक असर देखने को मिला। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक भाजपा कार्यकर्ता सक्रिय नजर आए। महानगर में सुबह करीब 9:30 बजे झंडा मैदान से विशाल जुलूस निकाला गया।
बंद के दौरान शहर की सड़कों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और कई निजी स्कूल भी बंद रहे। बिरनी में मुख्य मार्ग को जाम किया गया। वहीं धनवार, जमुआ और बगोदर समेत कई इलाकों में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया।
भाजपा जिलाध्यक्ष रंजीत कुमार राय ने राज्य सरकार पर छात्रों की मांगों की अनदेखी करने और आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने का आरोप लगाया।
रांची में अधिकांश निजी स्कूल बंद
भाजपा के झारखंड बंद के आह्वान के बाद राजधानी रांची के अधिकांश निजी स्कूलों ने मंगलवार को स्कूल बंद रखने का फैसला किया है। स्कूल प्रबंधन की ओर से अभिभावकों को इसकी जानकारी पहले ही दे दी गई थी। बंद के चलते आज इन स्कूलों में नियमित कक्षाएं संचालित नहीं होंगी।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों के लिए हेल्पलाइन जारी
वहीं, रांची जिला प्रशासन ने आंदोलन में शामिल होने के लिए दूसरे जिलों से आए छात्रों की सुरक्षित घर वापसी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। प्रशासन के मुताबिक छात्रों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए 9162738438 नंबर जारी किया गया है।
प्रशासन का कहना है कि दूसरे जिलों से रांची आए छात्रों की सुविधा और सुरक्षित वापसी को लेकर मानवीय संवेदनशीलता के साथ यह पहल की गई है।
JPSC-JSSC विवाद को लेकर सियासत तेज
छात्रों के आंदोलन, विधानसभा घेराव और पुलिस कार्रवाई के बाद झारखंड में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा ने छात्रों पर लाठीचार्ज को मुद्दा बनाते हुए राज्य सरकार के खिलाफ बंद का आह्वान किया है। वहीं, JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और छात्रों की मांगों को लेकर भी राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है।


