रांची। झारखंड में वर्षों से अस्थायी मान्यता के आधार पर संचालित हाईस्कूलों को अब नए नियमों की कसौटी पर खरा उतरना होगा। राज्य के 158 ऐसे हाईस्कूल, जिन्हें एकीकृत बिहार के समय से स्थापना अनुमति मिली हुई है, उन्हें झारखंड माध्यमिक विद्यालय स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति नियमावली-2008 के तहत मान्यता लेना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा वर्ष 2008 से पहले अस्थायी मान्यता प्राप्त 21 अन्य स्कूलों को भी एक वर्ष के भीतर मान्यता की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
यानी राज्यभर में कुल 179 स्कूलों के लिए मान्यता की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। मान्यता मिलने के बाद ही इन स्कूलों को अगले वित्तीय वर्ष में सरकारी अनुदान मिलने का रास्ता साफ होगा।
जैक से मांगी गई अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने मार्च में झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) के सचिव को पत्र भेजकर इन स्कूलों की मान्यता की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा था। अब जैक से यह जानकारी मांगी गई है कि संबंधित स्कूलों के मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है।इसका उद्देश्य अगले वित्तीय वर्ष के लिए स्कूलों को मिलने वाले अनुदान की प्रक्रिया शुरू करना है।
मान्यता के लिए जमीन से लेकर शिक्षकों तक की शर्त
नियमावली के तहत स्कूलों को मान्यता पाने के लिए कई जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी। ग्रामीण क्षेत्र में विद्यालय के नाम पर कम से कम 2 एकड़ जमीन निबंधित होनी चाहिए, जबकि शहरी क्षेत्र में कम से कम 50 डिसमिल भूमि जरूरी है। 30 वर्ष की निबंधित लीज वाली जमीन भी मान्य हो सकती है।
200 बच्चों के लिए 7 कमरे और 3 लैब जरूरी
विद्यालय भवन में 200 विद्यार्थियों के लिए कम से कम 450 वर्गफीट के सात कमरे होने चाहिए। इनमें चार कक्षाएं और तीन प्रयोगशालाएं शामिल होना जरूरी है।स्कूल में पर्याप्त संख्या में बेंच-डेस्क की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
14 शिक्षक और सभी के लिए बीएड अनिवार्य
मान्यता के लिए प्रधानाध्यापक समेत कुल 14 शिक्षक होना जरूरी है। सभी शिक्षकों के लिए बीएड की योग्यता अनिवार्य रखी गई है।इसके साथ ही विद्यालय के पुस्तकालय में कम से कम 30 हजार रुपये मूल्य की किताबें, प्रयोगशाला में जरूरी उपकरण और विद्यार्थियों के लिए खेल सामग्री उपलब्ध होना भी आवश्यक है।
मान्यता के बाद ही अनुदान
शिक्षा विभाग के इस कदम से लंबे समय से अस्थायी मान्यता के आधार पर चल रहे स्कूलों को अब निर्धारित मानकों के अनुरूप अपनी व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी। स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उनके सरकारी अनुदान की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।



