रांची। JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर चल रहे विवाद में मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। अदालत ने CID की जांच की प्रगति का जायजा लिया और राज्य सरकार की ओर से पेश की गई सीलबंद रिपोर्ट का अवलोकन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने जांच की गति को लेकर टिप्पणी की और स्पष्ट किया कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े मामले को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता।
कोर्ट ने खुद देखी जांच की प्रगति रिपोर्ट
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने CID की आपराधिक जांच से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपी। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद उसे फिर से सीलबंद कर रिकॉर्ड में रख दिया। कोर्ट ने कहा कि इस रिपोर्ट की कॉपी याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।
सरकार बोली- जांच जारी, जवाब के लिए चाहिए 4 सप्ताह
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय ने चार सप्ताह का समय मांगा। सरकार का पक्ष था कि आपराधिक जांच अभी चल रही है और जांच पूरी तरह आगे बढ़ने के बाद ही मामले में विस्तृत जवाब दाखिल किया जा सकेगा।
कोर्ट ने पूछा- क्या सभी नियुक्त अभ्यर्थी दोषी हैं?
अदालत ने सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण बात कही कि भर्ती में कथित अनियमितता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि नियुक्ति पाने वाला हर अभ्यर्थी दोषी है। कोर्ट के मुताबिक कुछ अभ्यर्थी पूरी तरह निर्दोष हो सकते हैं और उन्हें किसी कथित गड़बड़ी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
इसी वजह से अदालत ने संकेत दिया कि आपराधिक जांच को उसके स्तर पर चलने दिया जाएगा, जबकि हाईकोर्ट फिलहाल भर्ती विज्ञापनों को रद्द करने से संबंधित सरकारी अधिसूचना की कानूनी स्थिति पर विचार करेगा।
जांच की गति पर कोर्ट ने जताई चिंता
जस्टिस दीपक रोशन ने रिपोर्ट के अवलोकन के बाद कहा कि जांच के शुरुआती चरण में गति अच्छी थी, लेकिन बाद में इसकी रफ्तार कम होती नजर आई। अदालत ने स्पष्ट किया कि इतने गंभीर मामले में जांच लगातार प्रभावी गति से आगे बढ़नी चाहिए, ताकि दोषियों की पहचान हो सके और निर्दोष अभ्यर्थियों को अनिश्चितता से बाहर निकाला जा सके।
18 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
अब इस मामले में अगली सुनवाई 18 सितंबर को सुबह 10:30 बजे होगी। इस दौरान W.P.(S) No. 6512/2026 समेत संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी।
कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि अगली सुनवाई तक सरकार की ओर से आवश्यक निर्देश उपलब्ध नहीं होते हैं, तो महाधिवक्ता कानूनी बिंदुओं पर अदालत की सहायता करेंगे। मामले में पहले से मिली अंतरिम राहत भी अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।



