रांची। झारखंड की खनिज संपदा और उससे मिलने वाले राजस्व के अधिकार को लेकर राज्य में सियासी टकराव तेज हो गया है। केंद्र सरकार के MMDR Act के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अब सड़क पर उतरने का फैसला किया है। JMM के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने कहा कि 7 सितंबर से पार्टी पूरे राज्य में चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगी।

पहले चरण में सभी प्रखंड मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन होगा। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन केवल कानून के विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि झारखंड के राजस्व और खनिज अधिकारों के मुद्दे को लेकर व्यापक जन-जागरण किया जाएगा।

JMM का सवाल- खनिज से मिलने वाला राजस्व किसका?

विनोद पांडे ने कहा कि झारखंड देश के खनिज राजस्व में बड़ा योगदान देता है। ऐसे में राज्य के खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व पर असर डालने वाले किसी भी प्रावधान का सीधा प्रभाव राज्य के विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ के राज्यों के खनिजों पर सेस लगाने के अधिकार से जुड़े फैसले का हवाला दिया और कहा कि राज्य को अपने संसाधनों से मिलने वाले राजस्व का अधिकार मिलना चाहिए।

₹1.36 लाख करोड़ बकाये का मुद्दा भी उठाया

JMM ने केंद्र के सामने झारखंड के कथित लंबित बकाये का मुद्दा भी उठाया है। पार्टी ने ₹1,36,000 करोड़ की राशि जल्द जारी करने की मांग की है।

विनोद पांडे का कहना है कि खनिज राजस्व राज्य की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसी से सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं को आर्थिक आधार मिलता है। उन्होंने दावा किया कि नए कानून से राज्य के राजस्व संग्रह पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

7 सितंबर से शुरू होगा पहला चरण

JMM की आंदोलन की शुरुआत 7 सितंबर से प्रखंड मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन के साथ होगी। पार्टी के अनुसार यह आंदोलन आगे जिला और प्रमंडल स्तर तक ले जाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा।

पार्टी ने केंद्र सरकार से स्पष्ट मांग की है कि MMDR Act में झारखंड के हितों को ध्यान में रखते हुए संशोधन किया जाए या फिर राज्य को होने वाले संभावित वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

आर्थिक नाकेबंदी तक पहुंच सकता है आंदोलन

JMM ने आंदोलन को लेकर सबसे बड़ी चेतावनी आर्थिक नाकेबंदी की दी है। विनोद पांडे ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने राज्य की मांगों को नजरअंदाज किया तो आंदोलन को इस स्तर तक ले जाया जा सकता है कि झारखंड से बाहर जाने वाली खनिज संपदा के परिवहन को रोकने पर विचार किया जाए।

यानी आने वाले दिनों में यह आंदोलन सिर्फ राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन तक सीमित रहने के बजाय राज्य की खनिज सप्लाई को लेकर भी बड़ा टकराव पैदा कर सकता है।

छात्र आंदोलन पर भी JMM ने साधा निशाना

छात्र आंदोलन और FIR को लेकर भाजपा की प्रतिक्रिया पर भी JMM ने सवाल उठाए हैं। विनोद पांडे ने कहा कि हिंसा और उपद्रव करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन वास्तविक दोषियों की पहचान वीडियो फुटेज के आधार पर की जानी चाहिए।उन्होंने बताया कि JMM के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से मुलाकात कर असामाजिक तत्वों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है।

अब केंद्र के रुख पर टिकी नजर

MMDR Act को लेकर JMM के आंदोलन के ऐलान से झारखंड में सियासी तापमान बढ़ गया है। 7 सितंबर से शुरू होने वाला आंदोलन कितना व्यापक होता है और केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल JMM ने साफ कर दिया है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और आक्रामक रूप दिया जा सकता है।