रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों के लिए संचालित प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं में राज्य को मिलने वाली केंद्रीय सहायता बढ़ाने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण मौजूदा केंद्रीय सहायता पर्याप्त नहीं है।
शिक्षा को सामाजिक बदलाव का आधार बताया
पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानती है। राज्य का प्रयास है कि कोई भी छात्र आर्थिक अभाव के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि आदिवासी और ग्रामीण बहुल झारखंड में छात्रवृत्ति योजनाएं लाखों विद्यार्थियों के लिए शिक्षा जारी रखने का महत्वपूर्ण सहारा हैं।
आय के आधार पर मिलता है छात्रवृत्ति का लाभ
हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि झारखंड में छात्रवृत्ति किसी जाति या समुदाय के आधार पर नहीं, बल्कि अभिभावकों की वार्षिक आय के आधार पर दी जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कारण छात्रवृत्ति पर वित्तीय बोझ लगातार बढ़ रहा है। विशेष रूप से ओबीसी वर्ग की बड़ी आबादी के बावजूद केंद्र से मिलने वाली सहायता पर्याप्त नहीं है।
राज्य ने केंद्र से अधिक खर्च किया
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024-25 और 2025-26 के वित्तीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि छात्रवृत्ति योजनाओं के संचालन में राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की तुलना में अधिक राशि खर्च की है। उन्होंने पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत झारखंड के लिए निर्धारित नोटेशनल एलोकेशन बढ़ाने की मांग की, ताकि सभी पात्र विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति मिल सके।
एसटी प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति का मुद्दा भी उठाया
पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2025-26 में अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत झारखंड को केंद्र से कोई राशि प्राप्त नहीं हुई। साथ ही पूर्व वर्षों की स्वीकृत राशि भी पूरी तरह जारी नहीं की गई, जिससे हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ा है।
अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना पर जताई चिंता
हेमंत सोरेन ने कहा कि 2021-22 के बाद से अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना के लिए भी केंद्र सरकार से कोई राशि नहीं मिली है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति योजनाएं शिक्षा और सामाजिक समानता को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं, इसलिए इनका नियमित वित्तपोषण जरूरी है।
पिछड़े राज्यों के लिए विशेष नीति की मांग
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए छात्रवृत्ति योजनाओं में केंद्रीय सहायता बढ़ाने के लिए नीतिगत निर्णय लेने का आग्रह किया। उनका कहना है कि इससे झारखंड समेत ऐसे राज्यों के लाखों विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति मिल सकेगी और उनकी शिक्षा बाधित नहीं होगी।


