रांची। झारखंड में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अब तक राज्य में 36 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। इनमें 18 मरीज बच्चे और किशोर हैं। मामलों में बढ़ोतरी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी और निजी अस्पतालों को अलर्ट रहने और जरूरत पड़ने पर आइसोलेशन वार्ड तैयार करने का निर्देश दिया है।
दूसरे राज्यों से लौटने वालों में मिल रहा संक्रमण
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक दिल्ली, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान में स्वाइन फ्लू के मामले अधिक हैं। इन राज्यों से झारखंड लौटने वाले कुछ लोगों में फ्लू जैसे लक्षण मिलने के बाद जांच कराई गई, जिसमें H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई।
दिल्ली से लौटे रिम्स के एक डॉक्टर भी सामान्य फ्लू जैसे लक्षणों से पीड़ित हुए थे। जांच में उनके संक्रमित होने की पुष्टि हुई। हालांकि, कई मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।
रिम्स में 30 सैंपल, 8 पॉजिटिव
रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में 31 अगस्त तक 30 संदिग्ध मरीजों के सैंपल की जांच की गई। इनमें आठ सैंपल पॉजिटिव मिले। खास बात यह है कि आठ संक्रमितों में छह की उम्र 8 से 14 साल के बीच है।स्वास्थ्य विभाग ने संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए रांची में रिम्स और जमशेदपुर में एमजीएम को अधिकृत किया है।
बच्चों और किशोरों में संक्रमण का खतरा ज्यादा
रिम्स माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार के मुताबिक बच्चों और किशोरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण उनमें वायरल संक्रमण जल्दी फैल सकता है। नवजात और छोटे बच्चों को भी विशेष सावधानी की जरूरत है।वहीं, वयस्कों में पहले हुए वायरल संक्रमणों के कारण प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत बेहतर हो सकती है।
निजी अस्पतालों से आंकड़े नहीं मिलने पर विभाग चिंतित
स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती संक्रमित मरीजों का सटीक आंकड़ा जुटाना है। विभाग का कहना है कि कुछ निजी अस्पताल और लैब संक्रमित मरीजों की जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं।
विभाग ने सभी निजी अस्पतालों और लैब को निर्देश दिया है कि H1N1 संक्रमित मरीजों की जानकारी तत्काल IDSP को उपलब्ध कराएं।जिलों को भी निर्देश दिया गया है कि संदिग्ध मरीज मिलने पर बिना देरी सैंपल की जांच कराई जाए। जरूरत पड़ने पर सैंपल रिम्स या एमजीएम भेजे जा सकते हैं।
डॉक्टर बोले- घबराने की नहीं, सावधानी की जरूरत
रिम्स के डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि स्वाइन फ्लू भी वायरल संक्रमण की तरह है। मरीजों में तेज बुखार, सर्दी और खांसी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है।
वहीं, रिम्स क्रिटिकल केयर विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य के अनुसार झारखंड में महानगरों की तुलना में प्रदूषण कम है। उनका मानना है कि सावधानी और समय पर इलाज से संक्रमण को नियंत्रित रखा जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने क्या दिए निर्देश?
0 संदिग्ध मरीजों की तत्काल जांच कराने को कहा गया है।
0 सरकारी और निजी अस्पतालों को सतर्क रहने का निर्देश।
0 जरूरत पड़ने पर आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने की व्यवस्था।
0 निजी लैब और अस्पतालों को संक्रमित मरीजों की जानकारी IDSP को देने के निर्देश।
0 गंभीर लक्षण वाले मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करें और खुद से दवा लेने से बचें।


