० हजारीबाग से होगी शुरुआत, रांची, दुमका, पलामू और जमशेदपुर में भी खुलेगी ओपन जेल; सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयारी

रांची। झारखंड की जेल व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य में पहली बार ओपन जेल की शुरुआत की तैयारी है, जहां चयनित कैदी अपने परिवार के साथ रह सकेंगे। उन्हें दिन में रोजगार के लिए बाहर जाने और शाम तक वापस लौटने की अनुमति होगी। इसकी शुरुआत हजारीबाग केंद्रीय कारा से की जाएगी।

हजारीबाग में बनेगी 32 एकड़ में ओपन जेल

पहले चरण में हजारीबाग केंद्रीय कारा परिसर में करीब 32 एकड़ भूमि पर ओपन जेल विकसित की जाएगी। यहां लगभग 100 आवासीय फ्लैट बनाए जाएंगे, जहां चयनित बंदी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रह सकेंगे।

इन जिलों में भी मिलेगी सुविधा

हजारीबाग के बाद रांची, दुमका, पलामू और जमशेदपुर की केंद्रीय जेलों में भी ओपन जेल स्थापित करने की योजना है। हालांकि इन स्थानों पर फिलहाल भूमि उपलब्ध नहीं है। जमीन मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

उच्चस्तरीय समिति करेगी कैदियों का चयन

ओपन जेल में केवल उन्हीं बंदियों को रखा जाएगा, जिनका चयन उच्चस्तरीय समिति करेगी। जब तक नई ओपन जेलें तैयार नहीं होतीं, तब तक राज्य की विभिन्न जेलों में ओपन बैरक बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। चयनित कैदी दिन में रोजगार या अन्य जरूरी कार्यों के लिए बाहर जा सकेंगे और शाम तक वापस लौटना अनिवार्य होगा।

क्या होती है ओपन जेल?

ओपन जेल ऐसी सुधारात्मक व्यवस्था है, जहां पारंपरिक जेलों की तरह ऊंची दीवारें, लोहे की सलाखें या कड़ी सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती। कैदियों को सीमित निगरानी में समाज के बीच रहकर काम करने का अवसर दिया जाता है, ताकि वे सामान्य जीवन में वापस लौटने के लिए तैयार हो सकें। निर्धारित समय पर वापस नहीं लौटने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।

झारखंड में अब तक नहीं थी ओपन जेल

देश के 17 राज्यों में 100 से अधिक ओपन जेलें संचालित हैं, लेकिन झारखंड में अब तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। हजारीबाग में पहले एक खुली जेल की अवधारणा थी, जिसे बाद में आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए विशेष जेल के रूप में विकसित कर दिया गया था। अब राज्य में आधुनिक ओपन जेल प्रणाली लागू करने की दिशा में पहल की जा रही है।