JP Jayanti: लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 124वीं जयंती पर पटना में राजकीय समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी, मंत्री रामकृपाल यादव समेत कई नेता मौजूद रहे।
सीएम सम्राट ने प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर दी श्रद्धांजलि
समारोह के दौरान राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं ने जेपी गोलंबर स्थित जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि देश और खासकर बिहार के लिए जयप्रकाश नारायण के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जेपी के नेतृत्व में 1974 में शुरू हुआ छात्र आंदोलन देश की दशा और दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
IIBM सभागार में भव्य संगोष्ठी का आयोजन
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर आज रविवार 11 अक्टूबर को जेपी विचार मंच के तत्वावधान में आईआईबीएम (IIBM) सभागार में एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के व्यक्तित्व, कृतित्व, वैचारिक दर्शन, सामाजिक परिवर्तन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा भारतीय लोकतंत्र की रक्षा में उनके ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।
वक्ताओं ने जेपी के जीवन संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी देश के युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेतृत्व के लिए प्रेरणास्रोत हैं। कार्यक्रम में जेपी आंदोलन से जुड़े संस्मरणों के माध्यम से उस ऐतिहासिक दौर को याद किया गया, जिसने भारतीय राजनीति और लोकतांत्रिक चेतना को नई दिशा प्रदान की।
पद्मश्री डॉ. विमल जैन की पुस्तक का लोकार्पण
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण पद्मश्री डॉ. विमल जैन की पुस्तक ‘क्यों छात्रों पे चली गोलियां?’ का लोकार्पण रहा। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी ने पुस्तक का लोकार्पण किया। पुस्तक के शीर्षक के माध्यम से उस ऐतिहासिक दौर, छात्र आंदोलन और उससे जुड़े सवालों पर चिंतन का अवसर सामने आया।
छात्रों के आग्रह पर ‘संपूर्ण क्रांति’ का किया आह्वान
जयप्रकाश नारायण (लोकनायक जेपी) एक महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और राजनेता थे। उनका जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार के सारण जिले के सिताब दियारा गांव में हुआ था। उन्होंने उच्च शिक्षा अमेरिका से प्राप्त की, जहां उन्होंने समाजशास्त्र और मार्क्सवाद का अध्ययन किया। वे 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े। उन्होंने 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। 1942 में वे हजारीबाग जेल से फरार होकर अंग्रेजों के खिलाफ भूमिगत हो गए थे।
1970 के दशक में देश में फैले भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ उन्होंने 1974 में छात्रों के आग्रह पर ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया। उनके नेतृत्व में चले इस आंदोलन (जेपी आंदोलन) ने तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार को चुनौती दी। 1975 में आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया। उनके प्रयासों से 1977 में देश में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। 8 अक्टूबर 1979 को पटना में उनका निधन हुआ। उन्हें 1965 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार और 1999 में मरणोपरांत देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
ये भी पढ़ें- दिल्ली के बाद अब बिहार में आंदोलन की तैयारी, माले विधायक संदीप सौरभ का बड़ा बयान

