० CID जांच में परीक्षा के बाद OMR भरकर पास कराने की आशंका; TDPL एजेंसी की भूमिका भी जांच के दायरे में

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने हजारीबाग पुलिस की मदद से अभ्यर्थी सुमन सौरभ को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पूछताछ में आरोपी ने परीक्षा में अनुचित तरीके अपनाने की बात स्वीकार की है।

OMR शीट में बाद में उत्तर भरकर पास कराने का खुलासा

CID की शुरुआती जांच में प्रश्नपत्र लीक होने के बजाय OMR शीट में परीक्षा के बाद सही उत्तर भरकर अभ्यर्थियों को पास कराने की साजिश के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, सेटिंग वाले अभ्यर्थियों को केवल उन्हीं सवालों के जवाब भरने के निर्देश दिए जाते थे जिनका उत्तर उन्हें निश्चित रूप से पता होता था। बाकी प्रश्न खाली छोड़ने और OMR शीट की कार्बन कॉपी जमा नहीं करने को कहा जाता था, ताकि बाद में सही उत्तर भरकर उन्हें सफल कराया जा सके।

कार्बन कॉपी नहीं मिलने से बढ़ा शक

CID के अनुसार, सुमन सौरभ के पास OMR शीट की कार्बन कॉपी नहीं मिली। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह परीक्षा पास कराने वाले कथित “सेटर” के संपर्क में था। उसने यह भी बताया कि उसके कुछ मूल दस्तावेज सेटर के पास थे और परीक्षा पास कराने के बदले तय रकम भी दी गई थी।

48 उत्तर भरकर भी पीटी में हो गया था चयन

14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम आने के बाद सुमन सौरभ की OMR शीट सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इसमें 100 में से केवल 48 प्रश्नों के उत्तर भरे होने के बावजूद उसका चयन हो गया था। इसी आधार पर उस पर संदेह गहराया और CID ने जांच आगे बढ़ाई।

पांच आरोपियों की रिमांड बढ़ी, पूर्व अध्यक्ष फिर तलब

CID ने मामले में पहले गिरफ्तार परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता कुमार गुप्ता समेत पांच आरोपियों की पुलिस रिमांड दो दिन के लिए बढ़ा दी है। वहीं, JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को भी शुक्रवार को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है। अब तक मिली जानकारी के आधार पर आयोग से अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे गए हैं।

TDPL एजेंसी की भूमिका पर भी जांच

CID ने JPSC से छह बिंदुओं पर जवाब तलब करते हुए पूछा है कि TDPL एजेंसी को परीक्षा संचालन का कार्यादेश किस आधार पर दिया गया और उसके चयन की प्रक्रिया क्या थी। एजेंसी को सौंपे गए कार्यों, परीक्षा नियंत्रक की भूमिका और संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां भी मांगी गई हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि उत्तर प्रदेश में परीक्षा और नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं के आरोपों के चलते TDPL को ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद उसे JPSC परीक्षा से जुड़े कार्य सौंपे गए। हालांकि, आयोग के पूर्व अध्यक्ष का दावा है कि चयन के समय एजेंसी ब्लैकलिस्टेड नहीं थी।

कई और अभ्यर्थी आ सकते हैं जांच के दायरे में

CID का मानना है कि जिन अभ्यर्थियों का चयन कथित सेटिंग के जरिए हुआ और जिनके पास OMR शीट की कार्बन कॉपी नहीं मिलेगी, वे भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। एजेंसी अब परीक्षा प्रक्रिया, OMR हैंडलिंग और भर्ती से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।