प्रमोद कुमार, कैमूर। जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान के गांव नौघरा स्थित अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता को लेकर छात्र-छात्राओं ने सवाल उठाए हैं। विद्यार्थियों ने विद्यालय प्रबंधन पर पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं देने का आरोप लगाया है। इससे नाराज छात्र-छात्राएं अपनी थालियां लेकर बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री एवं स्थानीय विधायक मोहम्मद जमा खान के आवास पर पहुंच गए। हालांकि, वहां उनकी मुलाकात मंत्री से नहीं हो सकी।
जानवरों जैसा खाना परोसने का आरोप
छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि आवासीय विद्यालय में उन्हें शुरू से ही निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि दाल और सब्जी काफी पतली होती है तथा भोजन की मात्रा इतनी कम रहती है कि पेट भी नहीं भर पाता। कुछ विद्यार्थियों ने भोजन की स्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें जानवरों जैसा खाना परोसा जा रहा है। भोजन की व्यवस्था से नाराज छात्र-छात्राएं अपनी शिकायत लेकर मंत्री जमा खान के आवास पर पहुंचे। विद्यार्थियों के अनुसार, वहां मौजूद लोगों ने उन्हें बताया कि मंत्री उस समय गांव में नहीं हैं और अगले दिन आएंगे।
संचालन के लिए मिलती है सरकारी राशि
इस पर छात्रों ने अपनी परेशानी जाहिर करते हुए सवाल उठाया कि जब उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है, तो वे अगले दिन तक इंतजार कैसे करेंगे? उनका कहना है कि आवासीय विद्यालय में रहने वाले छात्र को समय पर पर्याप्त और पौष्टिक भोजन मिलना चाहिए, ताकि वे स्वस्थ रहकर अपनी पढ़ाई कर सकें। छात्र-छात्राओं ने यह भी सवाल उठाया कि जब आवासीय विद्यालय के संचालन के लिए सरकारी राशि उपलब्ध कराई जाती है, तो फिर भोजन की गुणवत्ता और मात्रा में कमी क्यों है? हालांकि, भोजन की वास्तविक गुणवत्ता, निर्धारित मेन्यू और खर्च से संबंधित आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
56 करोड़ की लागत से बना है विद्यालय
छात्र मोहम्मद अबास अजिमल,नूर सबी, फिजा जहां ने बताया कि इस अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय का उद्घाटन करीब डेढ़ महीने पहले ही स्थानीय विधायक सह अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान ने किया था। विद्यालय के निर्माण पर करीब 56 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात कही जा रही है। विद्यालय के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम में बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार भी पहुंचे थे। इतने बड़े लागत से तैयार आवासीय विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों ने व्यवस्था पर चिंता बढ़ा दी है। छात्रों का आरोप है कि विद्यालय शुरू होने के समय से ही उन्हें मानक के अनुरूप भोजन नहीं मिल रहा है।
शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप
विद्यार्थियों ने केवल भोजन ही नहीं, बल्कि पढ़ाई की व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि विद्यालय में कई विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि वे बेहतर शिक्षा प्राप्त करने की उम्मीद से आवासीय विद्यालय में दाखिला लेकर रह रहे हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी और अन्य समस्याओं के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों ने मांग की है कि विद्यालय में सभी आवश्यक विषयों के शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि उनकी पढ़ाई नियमित रूप से हो सके।
छात्राओं ने स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं पर भी उठाए सवाल
कुछ छात्राओं ने स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्था को लेकर भी शिकायत की। उनका आरोप है कि किसी छात्रा के बेहोश होने की स्थिति में दीपा मैम उनकी सहायता के लिए नहीं आती हैं। छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि प्रिंसिपल से शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं पर समुचित ध्यान नहीं दिया जाता है। वहीं, जब इस संबंध मे अल्पसंख्यक पदाधिकारी सतेंद्र त्रिपाठी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने इस तरह की घटनाओं से इंकार करते हुए मामले की जांच करने की बात कही।
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