प्रमोद कुमार/कैमूर। जिले से एक अत्यंत शर्मनाक और मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। चांद प्रखंड के भरारी कला पंचायत स्थित डेढ़ुआ गांव में तालाब में डूबने से दो सगे भाइयों की दर्दनाक मौत के बाद, सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के नाम पर अवैध वसूली का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल कर्मियों ने प्रत्येक शव के लिए दो हजार रुपये की मांग की।
क्या है पूरा मामला?
गुरुवार को डेढ़ुआ गांव निवासी बबलू अंसारी के दो मासूम बेटे, रिजवान अली और जीशान अली, खेलते-खेलते खेत के पास स्थित तालाब के पास चले गए थे। नहाने के दौरान गहरे पानी में चले जाने से दोनों बच्चों की डूबकर मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भभुआ सदर अस्पताल भेजा।
पोस्टमार्टम के नाम पर अवैध बोली
दुख की इस घड़ी में जब परिजन अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें एक और त्रासदी का सामना करना पड़ा। आरोप है कि पोस्टमार्टम करने वाले निजी कर्मियों ने प्रति शव दो हजार रुपये की मांग की। परिजनों द्वारा विरोध करने पर अस्पताल परिसर में हंगामा मच गया। इस संवेदनहीनता की जानकारी मिलते ही कैमूर डीएम नितिन कुमार सिंह ने मामले का संज्ञान लिया और अस्पताल के वरीय अधिकारियों को तत्काल निर्देश देकर पोस्टमार्टम संपन्न कराया।
अस्पताल प्रबंधन की सफाई और लापरवाही
भभुआ सदर अस्पताल के डीपीएम ऋषिकेश जायसवाल ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम कार्य के लिए तैनात कर्मियों को 15 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता है, फिर भी अवैध वसूली की बात सामने आना चिंताजनक है। उन्होंने जांच कर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ज्ञात हो कि सदर अस्पताल में स्थायी डॉक्टर की कमी के कारण पोस्टमार्टम का कार्य निजी कर्मियों के भरोसे चल रहा है।
इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। जहां एक ओर दो परिवारों का चिराग उजड़ गया वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक और मानवीय संवेदनहीनता ने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर क्या ठोस कदम उठाता है।

