प्रमोद कुमार, कैमूर। जिले में चल रहा विशेष भूमि सर्वेक्षण इन दिनों प्रशासनिक और तकनीकी कामकाज से ज्यादा रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है। जिले में कार्यरत अमीनों द्वारा अधिकारियों पर हर महीने पैसे की अवैध उगाही करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का संगीन आरोप लगाया गया है। इस पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है, जिसके चलते जिलेभर में भूमि सर्वेक्षण का काम पूरी तरह से ठप हो गया है।
रिश्वतखोरी का वायरल ऑडियो और आरोपों का दायरा
विवाद की शुरुआत एक कथित ऑडियो के तेजी से वायरल होने के बाद हुई, जिसमें भभुआ और दुर्गावती अंचल की विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी वैजयंती माला यादव द्वारा कथित तौर पर प्रत्येक अमीन से हर महीने दो हजार रुपये की रिश्वत मांगे जाने का दावा किया जा रहा है। वायरल ऑडियो के मुताबिक, इस राशि में से एक हजार रुपये खुद के लिए और एक हजार रुपये ऊपर के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता या सत्यता की पुष्टि नहीं की जाती है।
इस ऑडियो के सामने आने के बाद अमीन वर्ग में रोष फैल गया। इसके साथ ही, जिला बंदोबस्त पदाधिकारी नवीन कुमार पर भी कार्य के नाम पर अमीनों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और बेवजह दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं। अमीनों का आरोप है कि उन्हें बिना तार्किक आधार के कार्य पूरा करने का दबाव दिया जाता है और निर्देश न मानने पर वेतन में कटौती की धमकी दी जाती है। इन तमाम प्रताड़नाओं से तंग आकर जिलेभर के सभी अमीन एकजुट हो गए और डीएम को लिखित आवेदन सौंपकर पांच प्रमुख बिंदुओं पर न्याय की गुहार लगाई है।


प्रशासन और बंदोबस्त पदाधिकारी का पक्ष
दूसरी ओर, जिला बंदोबस्त पदाधिकारी नवीन कुमार ने अमीनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उनका कहना है कि कैमूर जिले में मौजा की संख्या अधिक होने और कार्य का बोझ ज्यादा होने के कारण सर्वेक्षण का काम तय समय सीमा में पूरा करना एक चुनौती है। वे लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं और लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जा रही है।
पदाधिकारी का स्पष्ट मानना है कि काम करने से बचने और अपनी कार्यशैली छिपाने के लिए कुछ लोग इस तरह के षड्यंत्र रच रहे हैं और मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं। वायरल ऑडियो के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि कोई कर्मी दोषी पाया जाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने साफ तौर पर निर्देश दिया है कि किसी भी अमीन से अवैध वसूली का कोई आदेश नहीं दिया गया है, इसलिए सभी अमीन अपने काम पर लौटें और सुचारू रूप से कार्य करें, किसी पर भी अनावश्यक कार्रवाई नहीं की जाएगी। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण के बाद से कैमूर का प्रशासनिक और मैदानी सर्वेक्षण महकमा असमंजस की स्थिति में है।

