पटना। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जाली भारतीय मुद्रा (FICN) की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ एक कार्रवाई की। बुधवार को एनआईए की टीमों ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुल 8 ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस हाई-प्रोफाइल रेड के दौरान कई अहम डिजिटल उपकरण, आपत्तिजनक दस्तावेज और भारी मात्रा में बांग्लादेशी मुद्रा बरामद की गई है, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय सिंडिकेट के कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
बिहार के औरंगाबाद और गयाजी में एनआईए की दबिश
एजेंसी ने अपनी इस कार्रवाई का दायरा बिहार के दो संवेदनशील जिलों तक फैलाया। एनआईए की विशेष टीमों ने औरंगाबाद में 2 और गयाजी (गया) में 3 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ दस्तक दी। इस दौरान संदिग्धों के घरों और ठिकानों की बारीकी से तलाशी ली गई। जांच अधिकारियों को इस दौरान कई ऐसे डिजिटल सबूत और दस्तावेज मिले हैं, जो जाली नोटों के नेटवर्क को सीधे तौर पर सीमा पार के तस्करों से जोड़ते हैं।
झारखंड के हजारीबाग और बंगाल के मालदा में भी रेड
बिहार के अलावा, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी एनआईए ने शिकंजा कसा। झारखंड के हजारीबाग जिले में 2 और पश्चिम बंगाल के मालदा में 1 ठिकाने पर तलाशी ली गई। हजारीबाग के सदर थाना क्षेत्र के बड़ा बाजार ओपी अंतर्गत हुरहुरू बाबा पथ स्थित शहीद सुभाष बारला मार्ग पर दो घरों को पूरी तरह से घेरकर कार्रवाई की गई।
यहां प्रदीप साव और उदय साव नामक दो सगे ममेरे भाइयों के घरों पर एनआईए ने दबिश दी। मूल रूप से बिहार के गया जिले के बाराचट्टी के रहने वाले ये दोनों आरोपी लंबे समय से जाली नोटों के इस अवैध कारोबार से जुड़े बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस सिंडिकेट के तार किन-किन बड़े चेहरों और अंतरराष्ट्रीय तस्करों से जुड़े हुए हैं।

