प्रमोद कुमार, कैमूर। जिले के भभुआ शहर में स्वर्ण समाज इकाई के नेतृत्व में यूजीसी नियमों को वापस लेने, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन करने और आरक्षण में आर्थिक आधार को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर एक विशाल महा आक्रोश मार्च निकाला गया। यह मार्च भभुआ पटेल कॉलेज मैदान से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए जिला मुख्यालय पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

​आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग

​आंदोलन में शामिल स्वर्ण समाज के लोगों ने स्पष्ट किया कि उनकी यह मांग किसी भी वर्ग के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्राथमिकता दिलाना है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि समाज के हर वर्ग में आर्थिक रूप से पिछड़े लोग मौजूद हैं, इसलिए सरकारी योजनाओं और आरक्षण के निर्धारण में आर्थिक पिछड़ेपन को मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए ताकि जरूरतमंदों को उचित अवसर मिल सके।

​एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग का आरोप

​प्रदर्शन के दौरान एससी/एसटी एक्ट को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि इस कानून के कथित दुरुपयोग के कारण कई बार स्वर्ण समाज और अन्य वर्गों के निर्दोष लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक संशोधन किए जाएं।

​राजनीतिक चेतावनी और आंदोलन की रूपरेखा

​करणी सेना के प्रदेश प्रवक्ता प्रिंस सिंह और सदस्य अमित कुमार ट्विंकल ने कहा कि यह मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए किया गया है। हालांकि, नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक रूप देते हुए हाईवे जाम और रेल रोको जैसे कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, केंद्र की भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा गया कि सुनवाई न होने पर आगामी चुनावों में राजनीतिक बहिष्कार जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।