राकेश कथूरिया, कैथल। वीरवार को हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जाखौली अड्डा में जिला स्तरीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आयोग की अध्यक्ष तृप्ति हरिपाल श्योराण मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। प्रशिक्षण में शिक्षकों, स्कूल प्राचार्यों, बीईओ, डीईओ और विद्यालयों में गठित पॉक्सो समितियों के सदस्यों को पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों और शिकायत मिलने पर रिपोर्टिंग प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष भीमसेन अग्रवाल और एसडीएम संजय कुमार भी मौजूद रहे। आयोग की ओर से शशिकांत और निर्मल सिंह ने अधिकारियों व शिक्षकों को पॉक्सो कानून से जुड़े प्रावधानों और शिकायत मिलने के बाद की जाने वाली कार्रवाई की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया।

बच्चों की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी

हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष तृप्ति हरिपाल श्योराण ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनकी सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पॉक्सो से जुड़े मामलों में शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों को कानून के प्रावधानों के साथ अपनी जिम्मेदारियों की पूरी जानकारी होना जरूरी है। इसी उद्देश्य से स्कूलों में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का मकसद केवल कानून की जानकारी देना नहीं है। इसका उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा में शिक्षकों की भूमिका को और प्रभावी बनाना भी है। स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण देना जरूरी है, ताकि वे सशक्त और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित हो सकें।

यौन उत्पीड़न सिर्फ शारीरिक स्पर्श तक सीमित नहीं

आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि कई बार पॉक्सो, यौन उत्पीड़न और अन्य शिकायत निवारण तंत्रों के बीच अंतर को लेकर भ्रम की स्थिति रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न केवल शारीरिक स्पर्श तक सीमित नहीं है। मौखिक और गैर-मौखिक व्यवहार भी इसके दायरे में आ सकते हैं।

उन्होंने शिक्षकों और स्कूलों में गठित पॉक्सो समितियों से कहा कि ऐसे मामलों को संवेदनशीलता के साथ समझना जरूरी है। साथ ही हर मामले में कानून के प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई की जानी चाहिए।

स्कूलों में सुरक्षित माहौल पर जोर

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बच्चों के अधिकारों की रक्षा और शिकायतों से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी से काम करने पर जोर दिया गया। आयोग की ओर से अधिकारियों और शिक्षकों को पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी गई, ताकि स्कूल स्तर पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

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