सोनीपत। एक युवती ने अपनी पसंद से अपने पिता के दोस्त से शादी की थी। उम्र में करीब 24 साल के अंतर और रिश्ते की वजह से परिवार इस विवाह के खिलाफ था। शादी के बाद परिवार ने गांव तक छोड़ दिया, लेकिन करीब सात महीने बाद बेटी को जन्मदिन मनाने के बहाने वापस बुलाया गया। इसके बाद कनिका फिर कभी अपने पति के पास नहीं लौट सकी। अब इस मामले में अदालत ने उसके पिता को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

मामला सोनीपत के मुकीमपुर गांव की कनिका से जुड़ा है। अदालत में चले मामले के मुताबिक, कनिका ने 24 नवंबर 2020 को अपने पड़ोसी और पिता के परिचित वेदप्रकाश आंतिल से मेरठ स्थित आर्य समाज मंदिर में विवाह किया था। उस समय कनिका की उम्र 19 वर्ष थी, जबकि वेदप्रकाश करीब 43 वर्ष के थे। दोनों ने अपनी शादी का पंजीकरण भी कराया था।

इस विवाह का परिवार ने विरोध किया। बताया गया कि वेदप्रकाश उम्र में कनिका से काफी बड़े थे और रिश्ते में उसके दादा की उम्र के लगते थे। परिवार की नाराजगी इतनी बढ़ी कि परिजन मुकीमपुर छोड़कर रोहतक में रहने लगे। दूसरी तरफ कनिका अपने पति के साथ रहने लगी।

मामले में नया मोड़ जून 2021 में आया, जब कनिका अपनी इच्छा से मुकीमपुर वापस पहुंची और पति के साथ रहने लगी। अभियोजन के अनुसार, इससे उसके पिता विजयपाल की नाराजगी और बढ़ गई। करीब एक महीने बाद 6 जुलाई को विजयपाल बेटी को जन्मदिन मनाने के बहाने अपने साथ ले जाने पहुंचा।

कनिका पिता पर भरोसा करके उसके साथ कार में बैठ गई। लेकिन रास्ते में उसे कुछ अनहोनी की आशंका हुई। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, उसने अपने पति को एक वीडियो भी भेजा था, जिसमें उसने पिता और कुछ रिश्तेदारों से जान का खतरा होने की बात कही थी। आरोप है कि वह बार-बार पति के पास लौटने की बात कह रही थी।

अदालत के समक्ष अभियोजन ने आरोप लगाया कि गांव खेड़ी दमकन के पास कार में कनिका को लेकर विवाद हुआ। आरोप के अनुसार, विजयपाल ने उसके हाथ पकड़ लिए, जबकि उसके रिश्तेदार वीरेंद्र ने चुन्नी से उसका गला घोंट दिया। इसके बाद दोनों पर शव को मेरठ के पास गंगनहर में फेंकने का आरोप लगा।

पुलिस जांच के बाद मामला अदालत पहुंचा और लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. जसबीर सिंह की अदालत ने विजयपाल को दोषी करार दिया। अदालत ने हत्या, हत्या के लिए अपहरण और साक्ष्य मिटाने के मामलों में अलग-अलग सजा सुनाई।

अदालत ने हत्या के मामले में विजयपाल को उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा दी। हत्या के लिए अपहरण के मामले में भी उम्रकैद के साथ 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं साक्ष्य मिटाने के मामले में सात साल के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। तीनों सजाएं एक साथ चलेंगी और कुल जुर्माना 1.75 लाख रुपये है।

मामले में आरोपी बनाए गए वीरेंद्र को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर बरी कर दिया।

9 महीने बाद पति की भी कोर्ट परिसर में हत्या

इस मामले में एक और गंभीर घटना सामने आई थी। कनिका के पति वेदप्रकाश 22 अप्रैल को मामले में गवाही देने के लिए अदालत पहुंचे थे। इसी दौरान कोर्ट परिसर में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद विजयपाल समेत अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था।

कनिका के मामले में अदालत का फैसला आने के बाद करीब पांच साल पुराने इस प्रकरण में उसके पिता को अब उम्रकैद की सजा मिली है, जबकि दूसरे आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।