करनाल। किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आज सड़कों पर उतरकर सरकार के सामने कई मुद्दे उठाए। किसानों ने धान की सरकारी खरीद की तारीख आगे करने, धान में मॉश्चर की सीमा बढ़ाने, दूध और गन्ने के भाव में बढ़ोतरी समेत कई मांगें रखीं। किसानों ने मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील सरकार से की है।

15 सितंबर से शुरू हो धान की सरकारी खरीद

किसानों की प्रमुख मांग है कि धान की सरकारी खरीद 15 सितंबर से शुरू की जाए। किसानों का कहना है कि खरीद समय पर शुरू होने से उन्हें फसल बेचने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही धान में मॉश्चर की निर्धारित सीमा को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग भी की गई है।

दूध के दाम बढ़ाने की मांग

किसानों ने दूध के उचित दाम तय करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि पशुओं के चारे और खासकर खल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में मौजूदा भाव पर पशुपालकों के लिए खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। किसानों ने दूध का भाव बढ़ाने की मांग सरकार के सामने रखी है।

इसके साथ ही किसानों ने नकली दूध की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की। किसानों का कहना है कि नकली दूध की बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं के साथ-साथ दूध उत्पादन से जुड़े किसानों के हितों की भी रक्षा हो सके।

‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल दोबारा खोलने की मांग

किसानों ने ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल खोलने की मांग भी उठाई है। किसानों का कहना है कि जिन किसानों की फसल का पंजीकरण किसी कारण से पोर्टल पर नहीं हो पाया है, उन्हें दोबारा रजिस्ट्रेशन का मौका दिया जाना चाहिए, ताकि वे सरकारी व्यवस्था का लाभ उठा सकें।

गन्ने का भाव 650 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग

गन्ना किसानों ने भी अपनी मांग सरकार के सामने रखी है। किसानों ने गन्ने का भाव बढ़ाकर 650 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि खेती की लागत बढ़ने के बीच फसलों का उचित भाव मिलना जरूरी है।

10 सितंबर को पिहोवा में होगी किसान महापंचायत

किसानों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का भी ऐलान किया है। 10 सितंबर को पिहोवा में किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी। इसमें विभिन्न किसान संगठनों के बड़े नेता और बड़ी संख्या में किसान शामिल होंगे।

महापंचायत में किसानों की मौजूदा मांगों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही सरकार से मांगें मनवाने के लिए आगे की रणनीति पर भी फैसला लिया जा सकता है। किसानों के इस ऐलान के बाद आने वाले दिनों में किसान आंदोलन को लेकर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

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