सुमन चौहान, करनाल। धान कटाई का सीजन शुरू होने से पहले प्रशासन ने फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने की तैयारी तेज कर दी है। मंगलवार को लघु सचिवालय के सभागार में खरीफ-2026 के दौरान फसल अवशेषों की रोकथाम एवं नियंत्रण को लेकर जिला स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक हुई। डीसी डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने कृषि विभाग के साथ अन्य संबंधित विभागों के स्टाफ की फील्ड में ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने इस बार आगजनी के मामलों को शून्य पर लाने के लिए रणनीति तैयार करने को कहा।

गांव स्तर पर चलेगा जागरूकता अभियान
डीसी ने सभी एसडीएम को उपमंडल स्तर पर कृषि और संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक बुलाकर आवश्यक दिशा-निर्देश देने को कहा। इसके साथ ही उपमंडल स्तर पर जागरूकता गतिविधियां और बैठकें आयोजित कर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जाएगा।
उन्होंने गांव स्तर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। इनमें किसानों को फसल अवशेषों के इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन के लाभों की जानकारी दी जाएगी। शिक्षा विभाग स्कूलों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा। इसके जरिए विद्यार्थियों को अपने परिवार और आसपास के किसानों को फसल अवशेष नहीं जलाने के लिए प्रेरित करने की जानकारी दी जाएगी।
शिकायत मिलते ही कार्रवाई के निर्देश
बैठक में डीसी ने पुलिस अधिकारियों को सभी थाना प्रभारियों को अलर्ट रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कार्रवाई में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।
डीसी ने डीडीए को फील्ड में पर्याप्त स्टाफ की ड्यूटी सुनिश्चित करने को कहा। कृषि विभाग के साथ अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी निगरानी व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इसका उद्देश्य खेत स्तर पर फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की प्रभावी निगरानी करना है।
किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि
डीसी ने बताया कि फसल अवशेषों के इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए सरकार की ओर से 1200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। उन्होंने किसानों से इस सुविधा का लाभ उठाने और फसल अवशेष जलाने से बचने को कहा।
डीसी ने स्पष्ट किया कि आदेशों की अवहेलना कर फसल अवशेष जलाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हर गांव में करीब 700 कर्मचारी तैनात
कृषि विभाग के उपनिदेशक ने बैठक में बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर विभाग ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिले के प्रत्येक गांव में निगरानी के लिए लगभग 700 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
उन्होंने बताया कि 9वीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को भी फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति विशेष रूप से जागरूक किया जा रहा है। अलग-अलग स्थानों पर जागरूकता कैंप और वर्कशॉप आयोजित किए जा रहे हैं। हाल ही में जिले में दो किसान मेलों का आयोजन भी किया गया है। आने वाले समय में किसानों को जागरूक करने के लिए ऐसी गतिविधियां जारी रहेंगी।
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