करनाल। तरावड़ी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज की प्रश्नोत्तरी में एक युवती ने अपने प्रेम विवाह और परिवार की नाराजगी से जुड़ी समस्या सामने रखी। युवती ने बताया कि वह ब्राह्मण परिवार से है और उसने अनुसूचित जाति के युवक से प्रेम विवाह किया है। परिवार, खासकर उसकी मां, इस रिश्ते को स्वीकार नहीं कर रही हैं।
5 से 11 सितंबर तक आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याओं से जुड़े सवाल पूछने का अवसर दिया गया। इसी दौरान युवती ने अपनी प्रेम कहानी और अंतरजातीय विवाह के बाद परिवार में पैदा हुई स्थिति के बारे में अनिरुद्धाचार्य से सवाल किया।
युवती ने बताई प्रेम विवाह की कहानी
युवती ने बताया कि वह ब्राह्मण समाज से है और जिस युवक से वह प्रेम करती थी, वह अनुसूचित जाति से है। उसने अपनी मां को युवक के बारे में बताया और उससे शादी करने की इच्छा जताई, लेकिन उसकी मां इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं हुईं।
युवती ने कथा के दौरान अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वह अपने परिवार से रिश्ता खत्म नहीं करना चाहती। उसकी इच्छा है कि मां और परिवार उसके पति को स्वीकार कर लें और दोनों को साथ रहने दें।
अनिरुद्धाचार्य ने धर्म और शास्त्रों का दिया हवाला
युवती की बात सुनने के बाद अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि उसकी मां धर्म को समझती हैं और इसी वजह से वह बेटी को रोक रही थीं। उन्होंने शास्त्रों का हवाला देते हुए विवाह और वर्ण व्यवस्था से जुड़े अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों में ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय और शूद्र के विवाह को लेकर अलग-अलग व्यवस्थाओं का उल्लेख मिलता है। उनके अनुसार, ब्राह्मण कुल में जन्मे व्यक्ति या लड़की का विवाह ब्राह्मण में, वैश्य का वैश्य में, क्षत्रिय का क्षत्रिय में और शूद्र का शूद्र में होना चाहिए।
उन्होंने अंतरजातीय विवाह से होने वाली संतान के संदर्भ में भी शास्त्रों में वर्णसंकर की चर्चा का उल्लेख किया और कहा कि इसी वजह से युवती की मां उसे इस रिश्ते से रोक रही थीं।
‘अब विवाह कर लिया है तो पति के साथ निभाइए’
अनिरुद्धाचार्य ने युवती से कहा कि यदि उसने विवाह कर लिया है तो अब उसे अपने वैवाहिक जीवन को निभाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्णय लेने से पहले यदि युवती उनसे सलाह लेती तो वह अपनी बात पहले ही बता देते।
उन्होंने युवती से कहा कि यदि उसका पति उसे स्वीकार कर रहा है तो वह उसके साथ रहे और सास-ससुर के साथ खुश रहने का प्रयास करे।
युवती चाहती है परिवार भी पति को स्वीकार करे
युवती ने कहा कि वह अपने परिवार से रिश्ता खत्म नहीं करना चाहती। वह चाहती है कि उसकी मां और परिवार उसके पति को स्वीकार कर लें और दोनों को साथ रहने दें।
इस पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि धर्म की दृष्टि से उन्होंने जो निर्णय लिया, वह गलत था, लेकिन अब विवाह हो चुका है तो उसे निभाना चाहिए। उन्होंने युवती को पति के साथ रहने और परिवार के साथ संबंध बनाए रखने का प्रयास करने की बात कही।
‘आधार कार्ड देखकर प्यार करो…’ टिप्पणी भी चर्चा में
प्रश्नोत्तरी के दौरान अनिरुद्धाचार्य की एक टिप्पणी भी चर्चा में रही। उन्होंने प्रेम और विवाह को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा, “आधार कार्ड देखकर प्यार करो, प्रेम तो कुत्ते से कर लो, गधे से कर लो, किसी से प्रेम क्यों कर लो।”
उन्होंने इस संदर्भ में कहा कि मनुष्य के जीवन पर उसके कर्म, संस्कार और संगति का गहरा प्रभाव पड़ता है। उनके बयान के बाद कथा के दौरान कही गई यह टिप्पणी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
पूरी बातचीत का वीडियो रिकॉर्ड मौजूद
इस पूरे मामले में अनिरुद्धाचार्य महाराज और युवती के बीच हुई प्रश्नोत्तरी की पूरी बातचीत का वीडियो रिकॉर्ड मौजूद है। वीडियो में युवती द्वारा अपनी समस्या रखने और अनिरुद्धाचार्य द्वारा उसका जवाब दिए जाने का पूरा घटनाक्रम दर्ज है।
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