अनूप दुबे, कटनी (ढीमरखेड़ा)। जिले के आदिवासी अंजल में सावन के महीने में भी बारिश नहीं होने से खेती-किसानी संकट में पड़ गई है। ढीमरखेड़ा क्षेत्र के ग्राम कोठी और आसपास के गांवों में बारिश न होने के कारण खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। किसान बोरवेल के पानी के सहारे जैसे-तैसे धान की बोनी और फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन लगातार हो रही बिजली कटौती ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है।

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दरारों से किसानों में डर, मेहनत पर फिर सकता है पानी

धान की खेती में भीरी लागत और मेहनत लगती है। किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज और अपनी पूंजी लगाकर फसलों की बोनी तो कर दी है लेकिन अगर समय पर इंद्रदेव मेहरबान नहीं हुए तो फसलों के सूखने और भारी नुकसान होने का डर सता रहा है। वहीं बोरवेल से सिंचाई करने में भी बार-बार बिजली गुल होना बड़ी बाधा बन रहा है जिससे किसानों की चिंताएं दोगुनी हो गई है।

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विधायक ने बिजली अधिकारियों से की मुलाकात

किसानों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। विधायक ने क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए निर्बाध और पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं ताकि बारिश न होने की स्थिति में बोरिंग के जरिए फसलों को बचाया जा सके।

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