हरिद्वार के चंडीघाट स्थित ब्रह्मकुंड से शंकर और सावित्री ने दूसरी बार कांवड़ यात्रा शुरू की है। दंपती सहारनपुर के बहेड़ी गुर्जर गांव पहुंचकर शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।

हरिद्वार। चंडीघाट स्थित ब्रह्मकुंड से शंकर और सावित्री बने दंपती ने श्रावण मास में दूसरी बार कांवड़ यात्रा शुरू की। दोनों वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान से पूजन के बाद सहारनपुर के बहेड़ी गुर्जर गांव के लिए रवाना हुए, जहां शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।

कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले दंपती ने तीर्थाचार्य संत रामविशाल दास महाराज से आशीर्वाद लिया। उनके मार्गदर्शन में पंडितों ने वैदिक रीति से गंगाजल का पूजन कराया। इस दौरान हितेश दास महाराज, महातार शास्त्री समेत कई श्रद्धालु मौजूद रहे।

दूसरी बार उठाई कांवड़

पूजन के बाद पति-पत्नी ने बाबा हठयोगी महाराज का भी आशीर्वाद लिया। इसी सावन में यह दंपती दूसरी बार कांवड़ लेकर निकला है।

इससे पहले एक अगस्त को दोनों एक्स मुस्लिम कांवड़ यात्रा में शामिल हुए थे। उस दौरान उन्होंने हरिद्वार से गंगाजल लिया था और तीन अगस्त को गाजियाबाद पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया था।

संत ने क्या कहा

रामविशाल दास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म किसी व्यक्ति के बलपूर्वक मतांतरण का समर्थन नहीं करता। उनके मुताबिक, जो व्यक्ति श्रद्धा, अपनी स्वतंत्र इच्छा और पूर्वजों की संस्कृति के प्रति आस्था के आधार पर सनातन मार्ग अपनाता है, उसका सम्मान के साथ स्वागत किया जाता है।

उन्होंने कहा कि सावन में शिवभक्ति के साथ यह दंपती अपने गांव में जलाभिषेक के लिए जा रहा है। उनके अनुसार, यह उनके धार्मिक संकल्प और सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है।

शंकर ने बताई वजह

शंकर, जिनका पूर्व नाम शहजाद था, ने कहा कि सनातन धर्म में उन्हें पूजा, परंपरा और जीवन जीने की स्वतंत्रता के साथ संस्कारों का अनुभव हुआ है।

उन्होंने कहा कि श्रावण मास में दूसरी बार कांवड़ का जल उठाना उनके लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव है। दंपती का कहना है कि वे बहेड़ी गुर्जर पहुंचकर शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।

शंकर ने कहा कि उनका मानना है कि सभी के पूर्वज इस भूमि और इसकी सनातन परंपराओं से जुड़े रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपनी जड़ों को समझने और सत्य को जानने का प्रयास करने की बात कही।