कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व पर एक बड़ा पर्यावरणीय संकट मंडरा रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। जिसमें दावा किया गया है कि इस परियोजना के कारण आधे से ज्यादा पन्ना टाइगर रिजर्व जलमग्न (डूबा) हो जाएगा। परियोजना के निर्माण के लिए लगभग 60 लाख पेड़ काटे जाएंगे। इससे बाघों, घड़ियालों और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पूरी तरह प्रभावित होंगे।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश करे। केन-बेतवा लिंक परियोजना का मुख्य उद्देश्य सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र (मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश) में पीने के पानी और सिंचाई की समस्या को दूर करना है।
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इसके तहत केन नदी के पानी को बेतवा नदी में डायवर्ट करने के लिए ‘दौधन बांध’ (Daudhan Dam) का निर्माण प्रस्तावित है। लेकिन इस विकास परियोजना की कीमत पर्यावरण को चुकानी पड़ रही है। पर्यावरणविदों और याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और टाइगर रिजर्व के डूबने से जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।
एक तरफ जहां बुंदेलखंड के विकास का दावा है, वहीं दूसरी तरफ पन्ना के जंगलों का अस्तित्व दांव पर है। अब देखना होगा कि हाईकोर्ट में सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट आने के बाद क्या रुख अपनाया जाता है और कोर्ट क्या तय करता है आने वाली सुनवाई में तय होगा।
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