अमित पाण्डेय, खैरागढ़। खैरागढ़ छुईखदान गंडई जिले में पुलिस लगातार कार्रवाई कर पशु तस्करों को पकड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद मवेशियों को दूसरे राज्य ले जाने के मामले सामने आ रहे हैं। शुक्रवार को साल्हेवारा पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में 10 मवेशियों को बरामद करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। साथ ही तस्करी में इस्तेमाल दो पिकअप वाहन और चार मोबाइल भी जब्त किए गए हैं।

पढ़िए पूरी खबर

पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग पिकअप में मवेशियों को ठूंसकर नागपुर की ओर ले जा रहे हैं। सूचना मिलते ही साल्हेवारा थाना के सामने नाकाबंदी कर वाहनों की जांच शुरू की गई। नाकाबंदी के दौरान MP 50-G-2381 नंबर की बोलेरो पिकअप को रोका गया। जांच करने पर वाहन में 6 भैंसें ठूंसकर भरे मिले।

पुलिस ने वाहन में सवार दो लोगों से पूछताछ की, तो उनकी पहचान अमन मेरावी (23) और अजय वीके (19) के रूप में हुई। दोनों बालाघाट जिले के मलाजखंड क्षेत्र के रहने वाले हैं। पुलिस के अनुसार, मवेशियों को बिना चारा-पानी के क्रूरता पूर्वक ले जाया जा रहा था। मवेशियों की खरीदी-बिक्री और परिवहन के दस्तावेज मांगे, लेकिन आरोपी कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा सके।

इसी दौरान पुलिस ने दूसरी पिकअप CG 22-X-0378 को भी रोका। वाहन की तलाशी लेने पर इसमें 4 भैंस और पड़वा मिले। पुलिस के मुताबिक मवेशियों को डाले में ठूंसकर भरा गया था और तिरपाल से ढककर ले जाया जा रहा था। इस मामले में हरिशंकर ध्रुव (27) और उमेश कुमार साहू (30) को गिरफ्तार किया गया। दोनों बलौदाबाजार जिले के रहने वाले हैं।

आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया जेल

पुलिस ने दोनों मामलों में कुल 10 मवेशी, दो पिकअप वाहन और चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 12.08 लाख रुपये बताई गई है। साल्हेवारा थाने में दोनों मामलों में अपराध क्रमांक 27/2026 और 28/2026 दर्ज किए गए हैं। आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम और मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

लगातार पकड़े जा रहे तस्कर, फिर भी नहीं थम रहा खेल

जिले में पिछले कुछ समय से पशु तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पुलिस कार्रवाई भी कर रही है, लेकिन एक के बाद एक मामले सामने आने से अब तस्करी के पूरे नेटवर्क पर सवाल उठने लगे हैं। क्या अंतरराज्यीय सीमा से लगे जंगल और अंदरूनी रास्तों का फायदा उठाकर तस्कर खैरागढ़ जिले को नागपुर की ओर जाने वाले रास्ते के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं? यह बड़ा सवाल है, पुलिस के लिए अब सिर्फ वाहनों और आरोपियों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि मवेशी कहां से लाए जा रहे हैं, उन्हें कहां पहुंचाया जाना था और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं, इसका पता लगाना भी अहम होगा।

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