कुंदन कुमार/पटना। सिविल कोर्ट ने बहुचर्चित कोचिंग विवाद मामले में अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए मशहूर शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर और उनके तीन सहयोगियों को जमानत दे दी है। इसके साथ ही फायरिंग के आरोप में जेल में बंद उनके दोनों बॉडीगार्ड्स प्रदीप कुमार और तालेबर सिंह की जमानत याचिका भी कोर्ट ने मंजूर कर ली है। इस फैसले के बाद खान सर की कानूनी मुश्किलें फिलहाल कम होती नजर आ रही हैं।
वकील ने दी जानकारी: सभी 6 को मिली राहत
खान सर के अधिवक्ता अरविंद कुमार ने फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि कोर्ट ने कुल 6 लोगों की जमानत याचिका को मंजूरी दी है। वकील ने स्पष्ट किया कि खान सर की एंटीसिपेटरी बेल (अग्रिम जमानत) को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। उन्होंने पुलिस जांच पर संतोष जताते हुए कहा कि पुलिस द्वारा तैयार की गई केस डायरी में मामले की सच्चाई को निष्पक्ष रूप से दर्ज किया गया था जिसे आधार बनाकर कोर्ट ने राहत दी है। सबसे अंत में फायरिंग मामले में जेल में बंद दोनों सुरक्षाकर्मियों की सुनवाई हुई और उन्हें भी बेल दे दी गई।
क्या था क्रिमिनल हिस्ट्री का विवाद?
सुनवाई के दौरान मामला तब उलझा जब रौशन आनंद पक्ष के अधिवक्ता सत्या झा ने खान सर की जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कोर्ट के समक्ष दलील दी थी कि खान सर ने अपनी क्रिमिनल हिस्ट्री छिपाई है। इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने 10 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखते हुए उनसे आपराधिक रिकॉर्ड जमा करने को कहा था। बचाव पक्ष ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि पुलिस की फाइनल केस फाइल में उस मामले का जिक्र नहीं था इसलिए वह जानकारी नहीं दी गई थी।
अवैध हथियारों और वेरिफिकेशन पर उठे सवाल
इस केस में पुलिस की जांच के दौरान बॉडीगार्ड्स के हथियारों को लेकर चौंकाने वाली बातें सामने आई थीं। फायरिंग में इस्तेमाल हथियार उत्तर प्रदेश के कासगंज निवासी तालेबर सिंह का है। जांच में खुलासा हुआ कि उसका हथियार लाइसेंस ऑल इंडिया परमिट वाला नहीं था जिसके चलते उसे बिहार में हथियार ले जाने या सुरक्षा ड्यूटी करने की अनुमति नहीं थी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक तालेबर सिंह ने अपने हथियार की जानकारी स्थानीय प्रशासन आर्म्स मजिस्ट्रेट या संबंधित थाने को नहीं दी थी जो कानूनन अपराध है। साथ ही खान सर पर भी यह आरोप है कि उन्होंने बिना पुलिस वेरिफिकेशन के तालेबर सिंह को काम पर रखा। एक प्रतिष्ठित और जिम्मेदार व्यक्ति होने के नाते उनसे उम्मीद की जाती थी कि वे कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब कोर्ट से जमानत मिलने के बाद इस मामले की कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा।


