हेमंत शर्मा, इंदौर। खुड़ैल थाना क्षेत्र में 1 मार्च 2025 को हुई विजय पिता निर्भय सिंह की आत्महत्या (सुसाइड) का मामला अब सिर्फ एक सुसाइड केस नहीं, बल्कि पुलिस और सिस्टम पर गंभीर आरोपों का केंद्र बन चुका है। एक साल बीत चुका है, लेकिन न्याय अब भी अधूरा है। सबसे बड़ा सवाल वही-जब सुसाइड नोट में नाम साफ लिखे हैं, लोकेशन तक सामने है, तो आरोपी अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं?

लाखों रुपए का लेन-देन

अब इस केस में सबसे बड़ा आरोप-पुलिस की मिलीभगत का है। परिजनों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपी निलेश गुर्जर पुलिस से मिला हुआ है। दावा किया जा रहा है कि लाखों रुपए का लेन-देन हुआ, इसी वजह से पुलिस जानबूझकर गिरफ्तारी नहीं कर रही। यह आरोप सामने आते ही पूरे मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।

जमानत भी हो चुकी है निरस्त

जानकारी के मुताबिक, इस मामले में जिला कोर्ट और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट दोनों जगह से आरोपी की जमानत निरस्त हो चुकी है। इसके बावजूद आरोपी खुलेआम फरार है और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजनों के मुताबिक, पूरे विवाद की जड़ करोड़ों की जमीन डील है। आरोप है कि रामसिंह परिया ने सेटलमेंट के नाम पर करीब 1 करोड़ 50 लाख रुपए लिए। खसरे की गड़बड़ी के बाद नाम हटने के बावजूद मामला खत्म नहीं हुआ, बल्कि दोबारा आपत्ति लगाकर 2 करोड़ रुपए तक की मांग की गई। इसी दबाव ने विजय को आत्महत्या के लिए मजबूर किया।

मुख्य आरोपी निलेश गुर्जर अब भी फरार

एक आरोपी की गिरफ्तारी जरूर हुई, लेकिन मुख्य आरोपी निलेश गुर्जर अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। परिवार का दावा है कि उसकी लोकेशन गोवा में है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही। पूरे मामले में एसडीओपी सांवेर देवेंद्र धुर्वे से जब बात हुई तो उन्होंने कहा कि कुडेल थाना प्रभारी को आरोपी की गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए हैं जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी की जाएगी इसके साथ ही यह भी कहा कि अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है इसको लेकर भी थाना प्रभारी से पूछा जाएगा।

जांच अधिकारियों पर गंभीर आरोप

मृतक के भाई ने जांच अधिकारी बिहारी सावले और थाना प्रभारी करणी सिंह शक्तावत पर भी पैसों के लेन-देन के आरोप लगाए हैं। अगर ये आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे सिस्टम की साख पर सवाल है।मामले में बिल्डर अशोक ऐरन का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि एग्रीमेंट में गड़बड़ी की गई। इतना ही नहीं, कथित तौर पर आरोपी ने खुलेआम चुनौती देते हुए कहा—“तुम किसी को गिरफ्तार नहीं कर पा रहे, तो मेरे खिलाफ क्या कर लोगे?” यह बयान पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है।

न्याय नहीं मिला तो आत्महत्या

पीड़ित परिवार ने साफ कहा है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो पूरा परिवार आत्महत्या जैसा कदम उठा सकता है। मामला अब मुख्यमंत्री मोहन यादव तक पहुंच चुका है और परिवार ने उनसे सीधा हस्तक्षेप मांगा है। सबसे बड़ा सवाल अब भी वही-क्या पुलिस मिलीभगत के आरोपों से खुद को बचा पाएगी? क्या फरार आरोपी की गिरफ्तारी होगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? खुड़ैल का यह केस अब सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की परीक्षा बन चुका है-जहां हर देरी, हर चुप्पी सीधे न्याय पर सवाल उठा रही है।

खुड़ैल आत्महत्या मामला: पुलिस की भूमिका संदिग्ध, बिल्डर दे रहा सांसद के नाम की धमकी,

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m