हेमंत शर्मा, इंदौर। कलेक्टोरेट परिसर में सरकारी संबल योजना का लाभ दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी और वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी संबल योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने के एवज में एक पीड़ित परिवार से 25 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा है।
10 हजार एडवांस लिए, काम नहीं किया
पीड़ित परिवार का दावा है कि एक दलाल ने संबल योजना का लाभ दिलवाने का झांसा देकर उनसे 25 हजार रुपये की मांग की थी। दलाल ने शुरुआत में 10 हजार रुपये एडवांस के रूप में ले लिए, लेकिन पैसे लेने के बाद भी उसने काम नहीं कराया। इसके विपरीत, आरोपी काम पूरा करने से पहले ही बकाया 15 हजार रुपये देने के लिए परिवार पर लगातार दबाव बना रहा था। परेशान होकर पीड़ित परिवार ने मामले के पुख्ता सबूत जुटाए और ऑनलाइन पेमेंट रसीद, व्हाट्सऐप चैट तथा ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ कलेक्टर व डीआईजी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।
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‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत होगी तत्काल FIR
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कलेक्टोरेट परिसर और शासकीय कार्यों में किसी भी तरह की धोखाधड़ी या अनियमिता पर प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति रहेगी। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जांच में आरोप सही पाए जाते ही आरोपी के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए और नियमानुसार सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इस घटना के सामने आने के बाद कलेक्टोरेट और प्रशासनिक दफ्तरों में जमीन सौदों और विभिन्न सरकारी योजनाओं के नाम पर जारी ठगी के खेल को लेकर भी गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
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