Modi Government on Delimitation Bill: मोदी सरकार इस महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस सत्र में सरकार लोकसभा सीटें बढ़ाने के लिए संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन (संशोधन) बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल को पास कराने की पूरी कोशिश करेगी। इसे देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन (Delimitation) से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के लिए जल्द से जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। अब इसपर मोदी सरकार ने अपना जवाब खरगे को भेज दिया है। मोदी सरकार ने कहा है कि उसने पटनायक, स्टालिन, उद्धव, जगन मोहन से चर्चा की है। किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju ) के इस लेटर के बाद जल्द ही सरकार की तरफ से महिला आरक्षण और परिसीमन बिल लाने की अटकलें तेज हो गई है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे पत्र में कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय महत्व के सभी विषयों पर विचार-विमर्श के लिए डीएमके, समाजवादी पार्टी और कई अन्य दलों के साथ बातचीत की है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे गए लेटर में रिजिजू ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय महत्व के सभी विषयों पर विचार-विमर्श और चर्चा में सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी को महत्व देती है। इसी नजरिये से डीएमके, समाजवादी पार्टी (सपा) और कई अन्य दलों के साथ बातचीत की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस रचनात्मक भूमिका निभाएगी और भविष्य के महत्वपूर्ण विधेयकों के मार्ग में बाधा नहीं डालेगी। लेटर के मुताबिक, सरकार ने तमाम बड़े विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर चर्चा कर ली है, जिसमें DMK, सपा, एआईएमआईएम, एनसीपी, शिवसेना (यूबीटी), बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी शामिल है।

परिसीमन बिल को लेकर विपक्ष का समर्थन मांगा: रिजिजू
रिजिजू ने कहा, ‘आपने बताया कि 13 अगस्त, 2026 को दोनों सदनों की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 64 दिन बीत जाने के बावजूद संसद का सत्रावसान नहीं किया गया है। इस पर मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद किसी निश्चित अवधि के भीतर उसका सत्रावसान करने की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है। इस लेटर सबसे अहम बात परिसीमन बिल को लेकर लेकर है। रिजिजू ने कहा, ‘सरकार ने परिसीमन संशोधन विधेयक पर विचार और इसे पारित कराने के लिए विपक्ष का समर्थन और सहयोग लगातार मांगा है। प्रमुख विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस से सरकार ने कई मौकों पर संपर्क किया है। केंद्रीय मंत्री का कहना है कि मानसून सत्र के दौरान उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा की और उनका सहयोग मांगा।
विपक्षी नेताओं के संपर्क में मोदी सरकार
रिजिजू ने लेटर में बताया कि प्रस्तावित विधेयक के समर्थन को लेकर डीएमके, समाजवादी पार्टी, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, एनसीपी, शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और बीजू जनता दल सहित विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में यह स्पष्ट नहीं है कि परामर्श की मांग बार-बार क्यों की जा रही है, जबकि सरकार चर्चा के लिए पहले ही लगातार प्रयास कर चुकी है।
खरगे ने प्रधानमंत्री को चौथी बार लिखा पत्र
बता दें कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन (Delimitation) से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के लिए जल्द से जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। यह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को लिखा गया उनका चौथा पत्र है। खड़गे ने जोर दिया कि संसद में कोई भी नया संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए। शुक्रवार को लिखे पत्र में खड़गे ने कहा कि संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद दो महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद संसद के दोनों सदनों की अगली बैठक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने सरकार से मॉनसून सत्र की स्थिति औपचारिक रूप से स्पष्ट करने और परिसीमन से संबंधित किसी भी नए प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले सर्वदलीय बैठक आयोजित करने का आग्रह किया था।
पिछली बार बिल को पास नहीं करा पाई थी सरकार
बता दें कि पिछली बार मोदी सरकार बिल को लोकसभा से पास नहीं करा पाई थी। (16 और 17 अप्रैल) पहले सरकार लोकसभा में दो तिहाई बहुमत जुटा नहीं पाई थी जिसकी वजह से वह बिल को पास कराने में कामयाब नहीं रही थी। लोकसभा में 543 सांसद हैं। 3 सीटें खाली हैं। इनमें से NDA के 318 सांसद हैं। बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई यानी 360 वोट चाहिए। अगर डीएमके के 22 सांसद बिल का समर्थन करते हैं तो बिल के समर्थन में 340 सांसद हो जाएंगे। यानी इसके बाद भी भाजपा को लगभग 20 सांसदों की जरूरत है। वहीं राज्यसभा में सरकार के पास 245 सीटें हैं। जिनमें से 3 खाली हैं। इस तरह 240 में से NDA के 153 सांसद हैं। यहां बिल को पास कराने के लिए 162 सांसद चाहिए। यानी, यहां भी NDA को छोटी पार्टियों के 9 सांसदों की जरूरत पड़ेगी।
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