किशनगंज। किशनगंज पुलिस ने कोढ़ोबारी थाना के अपर थानाध्यक्ष सह पुलिस अवर निरीक्षक (SI) प्रमोद कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर निजी स्वार्थ के लिए अपराधियों से सांठगांठ करने, रिश्वतखोरी, और अपने पदीय कर्तव्यों में घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप हैं। पुलिस अधीक्षक (SP) संतोष कुमार द्वारा थानाध्यक्ष कोढ़ोबारी की लिखित रिपोर्ट मिलने के बाद यह सख्त कार्रवाई की गई है। इस घटना के बाद से पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
अवैध कार्यों के गंभीर आरोप
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, निलंबित अपर थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार यादव की कार्यशैली लंबे समय से संदेहास्पद रही है। उन पर मुख्य रूप से अवैध कारोबार करने वाले लोगों से गुप्त सांठगांठ रखने और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के जब्त किए गए वाहनों को छोड़ देने का आरोप है। विभागीय जांच में यह बात सामने आई है कि उन्होंने कई मामलों में नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमानी चलाई है, जिससे पुलिस विभाग की छवि को भारी नुकसान पहुंचा है। इन सभी गंभीर आरोपों को देखते हुए उन्हें 24 सितंबर 2026 से निलंबित करते हुए मुख्यालय अटैच कर दिया गया है और उन्हें सात दिनों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
एक के बाद एक कई मामलों में नियमों की अनदेखी
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, अपर थानाध्यक्ष पर एक के बाद एक कई गंभीर मामलों में लापरवाही बरतने के प्रमाण मिले हैं:
- लावारिस बाइक छोड़ना: आगामी 5 सितंबर 2026 की रात को लोहागाड़ा चौक से एक लावारिस मोटरसाइकिल बरामद हुई थी, जिसे सुरक्षा की दृष्टि से एसएसबी कैंप कंचनबाड़ी में सुरक्षित रखा गया था। आरोप है कि अगले ही दिन उस बाइक को बिना किसी कागजी कार्रवाई और थाना रजिस्टर में प्रविष्टि किए ही छोड़ दिया गया।
- अवैध खाद लदा वाहन गायब करना: इसके बाद, 13 सितंबर 2026 को शराबबंदी अभियान के दौरान पुलिस गश्त में अवैध खाद से लदा एक पिकअप वाहन पकड़ा गया था। आरोप है कि वाहन को थाना लाने के बजाय रास्ते में ही खरखरिया चौक के पास बिना किसी वरीय अधिकारी को सूचना दिए छोड़ दिया गया।
- अवैध बालू खनन का ट्रैक्टर छोड़ा: वहीं, 23 सितंबर 2026 को दिन की गश्त के दौरान लक्ष्मीपुर नदी क्षेत्र में अवैध बालू खनन में संलिप्त पाए गए एक ट्रैक्टर को भी बिना किसी कानूनी और वैधानिक कार्रवाई के मुक्त कर दिया गया।
’जीरो टॉलरेंस’ नीति और चार दिन में जांच रिपोर्ट का आदेश
किशनगंज के पुलिस अधीक्षक ने इन सभी कृत्यों को कर्तव्य में घोर लापरवाही, संदिग्ध आचरण, नैतिक पतन, मनमानी और रिश्वतखोरी जैसी गंभीर श्रेणी माना है। इस पूरे प्रकरण की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ-2), किशनगंज को सौंपी गई है। जांच अधिकारी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे चार दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट समर्पित करें।
किशनगंज पुलिस प्रशासन ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि विभाग में भ्रष्टाचार, अनियमितता और कर्तव्यहीनता के खिलाफ सख्त ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई गई है। प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि जांच में जो भी पुलिसकर्मी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कड़ी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई महकमे में जवाबदेही और पारदर्शिता कायम करने की दिशा में एक बड़ा संदेश मानी जा रही है।


