अधिकमास के दौरान आने वाली पद्मिनी एकादशी इस बार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अवसर लेकर आई है। कमला या पुरुषोत्तमी एकादशी के नाम से प्रसिद्ध यह तिथि साधना, संयम और भक्ति का अनूठा संगम होने वाली है। अधिकमास को स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित माह माना गया है। ऐसे में इस माह में पड़ने वाली एकादशी का महत्व और बढ़ जाता है।
पद्मिनी एकादशी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दुर्लभता है। यह हर वर्ष नहीं आती, बल्कि लगभग तीन वर्ष में एक बार इसका संयोग बनता है। यही कारण है कि इसे अन्य एकादशियों की तुलना में अधिक फल देने वाली एकादशी में गिना जाता है। पौराणिक कथाओं में भी इस व्रत का उल्लेख मिलता है, जहां कार्तवीर्य अर्जुन के माता-पिता ने संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत किया था।
एकादशी तिथि और व्रत का समय
पंचांग के अनुसार, पद्मिनी एकादशी तिथि का आरंभ 27 मई को सुबह 6:22 बजे से होगा और 28 मई सुबह 7:22 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 27 मई को रखा जाएगा, जबकि पारण 28 मई को किया जाएगा।
पद्मिनी एकादशी पर पूजा और व्रत विधि
इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा की जाती हैं । व्रत रखने वाले श्रद्धालु निर्जल या फला हार का पालन करते हुए दिनभर भक्ति में लीन रहते है, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, मंत्र जाप और रात्रि में भजन-कीर्तन का आयोजन इस दिन को और भी विशेष बनाता है।
एकादशी व्रत से पहले जान लें ये 5 नियम
- सात्विक भोजन अपनाएं, दशमी तिथि से ही लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से दूरी बनाकर केवल सात्विक आहार लें।
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें, सुबह जल्दी उठकर स्वच्छता और पूजा का संकल्प लेकर दिन की शुरुआत करें।
- तुलसी का महत्व, भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, इससे पूजा पूर्ण मानी जाती है।
- विचारों की शुद्धता रखें, इस दिन क्रोध, विवाद और नकारात्मकता से दूरी बनाकर शांत और सकारात्मक मन बनाए रखें।
- दान-पुण्य करें, जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करना इस दिन विशेष फल दायी माना जाता है ।
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