गोविन्द पटेल, कुशीनगर. जनपद में अवैध खनन के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और खनन माफियाओं के प्रभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है. सवाल यह उठ रहा है कि जब अवैध खनन पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा था, तब कार्रवाई की जद में खनन माफिया नहीं बल्कि कार्रवाई करने वाले अधिकारी ही क्यों आ गए. सूत्रों के अनुसार बीते दिनों जिले में अवैध खनन के खिलाफ लगातार छापेमारी की जा रही थी. नदी घाटों से लेकर खनन के संभावित ठिकानों तक निगरानी बढ़ाई गई थी. बिना परमिट और ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की जा रही थी. खासकर बिहार सीमा से आने वाले अवैध खनन से जुड़े ट्रकों पर शिकंजा कसने से खनन कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ था.
बताया जाता है कि करोड़ों रुपये के इस खेल पर सख्ती का असर पड़ने लगा था. कई मामलों में जुर्माना, जब्ती और कानूनी कार्रवाई की खबरें भी सामने आईं. लेकिन इसी बीच अचानक हालात बदले और अवैध खनन के खिलाफ मोर्चा संभाल रहे अधिकारी अभिषेक सिंह पर ही कार्रवाई की गाज गिर गई. उन्हें निलंबित कर दिया गया. यहीं से सवालों का सिलसिला शुरू हो गया है. यदि अधिकारी की कार्यशैली में कोई खामी थी तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन जनमानस यह भी पूछ रहा है कि क्या अवैध खनन के खिलाफ की गई कार्रवाई गलत थी. यदि कार्रवाई सही थी तो फिर कार्रवाई करने वाला ही निशाने पर क्यों आ गया, जनपद में चर्चा है कि अवैध खनन का कारोबार केवल मशीनों और वाहनों के दम पर नहीं चलता, बल्कि इसके पीछे प्रभावशाली संरक्षण और मजबूत नेटवर्क भी सक्रिय रहता है.
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ऐसे में जब किसी अधिकारी की सख्ती से करोड़ों के कारोबार पर असर पड़ता है तो कई हित प्रभावित होना स्वाभाविक है. फिलहाल स्थिति यह है कि अवैध खनन से जुड़े तत्व राहत की सांस लेते दिखाई दे रहे हैं, जबकि उन पर कार्रवाई करने वाला अधिकारी सवालों और कार्रवाई के घेरे में है. इससे प्रशासनिक तंत्र को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अवैध खनन के खिलाफ सख्ती करने की कोई कीमत चुकानी पड़ती है, क्या यह संदेश उन अधिकारियों तक जाएगा जो अवैध कारोबारों पर नकेल कसने की कोशिश करते हैं. अब निगाहें शासन और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं. क्योंकि यह मामला केवल एक अधिकारी का नहीं, बल्कि अवैध खनन के खिलाफ चल रही लड़ाई की दिशा और उसके भविष्य से भी जुड़ा हुआ है. जनता जवाब चाहती है कि आखिर खनन माफियाओं पर चला बुलडोजर, तो अधिकारी पर गाज क्यों गिरी?

