Hylo Open 2026 Badminton: भारत के लिए जर्मनी में खेला गया हाइलो ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट यादगार बन गया। भारतीय शटलर्स लक्ष्य सेन और पीवी सिंधु ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला और पुरुष दोनों वर्गों के खिताब अपने नाम कर लिए। लक्ष्य ने इंडोनेशिया के जोनाथन क्रिस्टी को हराकर पुरुष एकल का खिताब जीता, जबकि दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधु ने डेनमार्क की लाइन होजमार्क कजेरफेल्ट को मात देकर महिला एकल की ट्रॉफी अपने नाम की।

दोनों भारतीय खिलाड़ियों ने अपने-अपने फाइनल मुकाबले सीधे गेमों में जीते। लक्ष्य ने क्रिस्टी को 21-17, 21-10 से हराया, वहीं सिंधु ने लाइन को 21-12, 21-14 से शिकस्त दी। इस जीत के साथ लक्ष्य ने जहां इस सीजन का पहला खिताब अपने नाम किया, वहीं सिंधु ने 2026 में दूसरी बार किसी टूर्नामेंट की ट्रॉफी जीती।

लक्ष्य सेन ने दूसरी बार जीता हाइलो ओपन

लक्ष्य सेन के लिए यह जीत कई मायनों में खास रही। वर्ल्ड रैंकिंग में 14वें नंबर पर मौजूद भारतीय खिलाड़ी ने फाइनल में छठी रैंकिंग वाले इंडोनेशियाई शटलर जोनाथन क्रिस्टी को टिकने का मौका नहीं दिया। इस जीत के साथ लक्ष्य के करियर में खिताबों की संख्या सात हो गई है। वह दूसरी बार हाइलो ओपन चैंपियन बने हैं। इससे पहले 2021 में भी उन्होंने इसी टूर्नामेंट का खिताब जीता था। दो बार यह ट्रॉफी जीतने वाले वह पहले भारतीय खिलाड़ी हैं।

इस सीजन लक्ष्य का प्रदर्शन लगातार एक जैसा नहीं रहा था। ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचने के बावजूद उन्हें कई टूर्नामेंट में शुरुआती दौर में हार का सामना करना पड़ा। वह आठ बार पहले ही राउंड में बाहर हुए थे। ऐसे में हाइलो ओपन की यह ट्रॉफी उनके लिए सीजन की बड़ी उपलब्धि के साथ वापसी का संकेत भी है। इससे पहले उन्होंने पिछले सीजन ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीता था।

पहले गेम में वापसी कर लक्ष्य ने बनाई बढ़त

फाइनल में लक्ष्य ने अच्छी शुरुआत करते हुए पहले गेम में 18-10 की मजबूत बढ़त बना ली थी। हालांकि, इसके बाद उनकी लय थोड़ी बिगड़ी और क्रिस्टी ने लगातार अंक जुटाकर स्कोर 17-18 तक पहुंचा दिया। मुकाबला रोमांचक मोड़ पर पहुंचने के बावजूद लक्ष्य ने दबाव में गलती नहीं की और लगातार जरूरी अंक हासिल कर पहला गेम 21-17 से जीत लिया।

दूसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी ने शुरुआत से ही मुकाबले पर पकड़ बनाए रखी। तेज स्मैश, बेहतर नेट प्ले और सटीक शॉट्स के दम पर उन्होंने क्रिस्टी को लगातार दबाव में रखा। इंडोनेशियाई खिलाड़ी वापसी का रास्ता नहीं खोज पाए और लक्ष्य ने 21-10 से दूसरा गेम जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया।

पीवी सिंधु ने भी जीती खिताबी जंग

महिला एकल में पीवी सिंधु ने डेनमार्क की लाइन होजमार्क कजेरफेल्ट को हराकर खिताब जीता। वर्ल्ड रैंकिंग में आठवें नंबर पर मौजूद सिंधु ने 39 मिनट तक चले फाइनल में 25वीं रैंकिंग की डेनिश खिलाड़ी को 21-12, 21-14 से मात दी। टूर्नामेंट में दूसरी वरीयता प्राप्त सिंधु ने शुरुआत से ही अपने खेल पर नियंत्रण रखा और प्रतिद्वंद्वी को वापसी का ज्यादा मौका नहीं दिया।

इस सीजन यह सिंधु की दूसरी बड़ी खिताबी जीत है। इससे पहले जुलाई में उन्होंने जापान ओपन का खिताब अपने नाम किया था। वहीं, पिछले सप्ताह फ्रेंच ओपन के फाइनल तक पहुंचने के बाद उन्हें उपविजेता रहना पड़ा था। हाइलो ओपन में उन्होंने फाइनल में मिले मौके को हाथ से नहीं जाने दिया।

21-12 से पहला गेम जीतकर बनाई पकड़

फाइनल के पहले गेम में सिंधु ने क्रॉस कोर्ट विनर के साथ शुरुआत की। हालांकि, कुछ गलतियों के चलते डेनमार्क की खिलाड़ी ने स्कोर 3-3 से बराबर कर लिया। इसके बाद भारतीय शटलर ने अपने शॉट चयन और तेज नेट गेम से मुकाबले की दिशा बदल दी। ब्रेक तक सिंधु 11-8 से आगे थीं। इसके बाद उन्होंने लगातार अंक जुटाए और 21-12 से पहला गेम अपने नाम कर लिया।

दूसरे गेम में भी सिंधु ने अपनी लय बरकरार रखी। उन्होंने शुरुआती दौर में 6-3 की बढ़त बनाई, लेकिन लाइन ने वापसी करते हुए स्कोर 6-7 कर दिया। इसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने फिर से मैच पर नियंत्रण हासिल किया। नेट पर डेनिश खिलाड़ी की गलतियों का फायदा उठाते हुए सिंधु ने 17-11 की बढ़त बना ली।

मैच के आखिरी दौर में सिंधु को छह चैंपियनशिप पॉइंट मिले। लाइन की एक और गलती के साथ भारतीय खिलाड़ी ने 21-14 से दूसरा गेम जीत लिया और हाइलो ओपन की ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया।

वर्ल्ड टूर फाइनल्स की उम्मीदों को भी मजबूती

हाइलो ओपन में जीत के साथ सिंधु को 9,200 रैंकिंग पॉइंट मिले हैं। इससे सीजन के आखिर में होने वाले BWF वर्ल्ड टूर फाइनल्स के लिए क्वालीफाई करने की उनकी उम्मीदों को मजबूती मिली है। जापान ओपन के बाद यह उनकी दूसरी खिताबी जीत है।

इस तरह जर्मनी में भारतीय बैडमिंटन के लिए दोहरी खुशी का मौका रहा। लक्ष्य सेन ने अपने करियर का सातवां खिताब जीतकर सीजन में वापसी की, वहीं सिंधु ने लगातार अच्छे प्रदर्शन को खिताबी सफलता में बदल दिया।

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