अनुज कुमार पांडेय, गोपालगंज। जिले के कुचायकोट थाना क्षेत्र में दर्ज एक हाई-प्रोफाइल और गंभीर आपराधिक मामले की जांच अब अपराध अनुसंधान विभाग को सौंप दी गई है। बिहार सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे आगे की तहकीकात के लिए सीआईडी के हवाले करने का बड़ा फैसला लिया है। इस मामले में सत्ताधारी दल जदयू के कुचायकोट से विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय, उनके भाई सतीश पांडेय और चार्टर्ड अकाउंटेंट राहुल तिवारी समेत कई अन्य रसूखदार लोगों के नाम शामिल हैं। सीआईडी को जांच मिलने के बाद से इलाके के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सरगर्मी काफी तेज हो गई है।

​सुप्रीम कोर्ट से विधायक पक्ष को मिली फौरी राहत

​एक तरफ जहां जांच का जिम्मा सीआईडी को सौंपा गया है, वहीं दूसरी तरफ इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से आरोपी पक्ष को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए फिलहाल किसी भी तरह की दंडात्मक या दबावपूर्ण कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही देश की शीर्ष अदालत ने पटना हाई कोर्ट को सुझाव दिया है कि वह इस केस से जुड़ी प्राथमिकी को रद्द करने की याचिका पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करे और जल्द से जल्द कोई प्रभावी निर्णय दे। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से विधायक और उनके समर्थकों ने फिलहाल राहत की सांस ली है।

​क्या है पूरा मामला?

​यह पूरा विवाद इसी साल 1 अप्रैल को दर्ज हुई एक एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार राय ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया था कि कुचायकोट थाना क्षेत्र के बेलवा गांव में स्थित 16 एकड़ 93 डिसमिल की कीमती जमीन को लेकर पुराना विवाद चल रहा है। शिकायत के अनुसार, जब वह अपनी जमीन की देखरेख करने पहुंचे, तो वहां पहले से मौजूद कुछ लोगों ने उन पर जमीन को अपने नाम करने का भारी दबाव बनाया। आरोप है कि विरोध करने पर आरोपियों ने वहां बने कमरे के ताले तोड़कर अवैध कब्जा करने की कोशिश की और डराने-धमकाने के उद्देश्य से मौके पर फायरिंग भी की गई।

​गिरफ्तारियां और साजिश के आरोप

​घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके से भोला पांडेय उर्फ राकेश पांडेय, गुड्डू कुमार, दीपक कुमार और नीतीश कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि, मामले का एक मुख्य आरोपी राहुल तिवारी घटना के बाद से ही फरार चल रहा है। एफआईआर में शिकायतकर्ता ने यह भी संगीन आरोप लगाया है कि इस पूरी वारदात और जमीन पर कब्जे के प्रयास के पीछे एक गहरी साजिश रची गई थी, जिसमें स्थानीय विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय और उनके भाई सतीश पांडेय मुख्य रूप से शामिल हैं।

​रिकॉर्ड हैंडओवर होने का इंतजार

​सीआईडी को केस ट्रांसफर होने के बाद अब स्थानीय स्तर पर कागजी प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि, आधिकारिक सूत्रों के अनुसार स्थानीय पुलिस ने अभी तक केस से जुड़े तमाम रिकॉर्ड और केस डायरी सीआईडी को हैंडओवर नहीं किए हैं।फिलहाल गोपालगंज पुलिस को सीआईडी की विशेष टीम के पहुंचने का इंतजार है, जिसके बाद सभी दस्तावेज सौंप दिए जाएंगे और मामले की नए सिरे से कड़ियों को जोड़ा जाएगा।