सड़क हादसे में जान गंवाने वाले लेक्चरर योगेश कुमार के अंगदान से तीन मरीजों को नई जिंदगी मिली है। पीजीआई चंडीगढ़ में उनका लीवर, किडनी और पैंक्रियाज प्रत्यारोपित किया गया।

चंडीगढ़। हिमाचल प्रदेश के सोलन निवासी 26 वर्षीय लेक्चरर योगेश कुमार के परिवार ने एक ऐसा साहसी और प्रेरणादायक फैसला लिया है, जिसने तीन अन्य परिवारों में खुशियां लौटा दी हैं। राजपुरा के आर्यन्स ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में कार्यरत योगेश 28 मई को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ लाया गया, लेकिन सिर में आई गंभीर चोटों के कारण डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रेन स्टेम डेड’ घोषित कर दिया। ऐसे कठिन समय में योगेश के परिजनों ने अंगदान करने का निर्णय लिया, जिससे तीन जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन प्राप्त हुआ और वे मौत को मात देने में सफल रहे।

तीन मरीजों को मिला जीवनदान

पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों की टीम ने योगेश के लीवर, दोनों किडनी और पैंक्रियाज को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया। एक मरीज को किडनी, दूसरे को किडनी और पैंक्रियाज, जबकि तीसरे मरीज को लीवर दान किया गया। रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा ने बताया कि योगेश के अंगों से संस्थान में 73वां सफल ‘सिमल्टेनियस पैंक्रियाज-किडनी ट्रांसप्लांट’ किया गया, जो चिकित्सा जगत में एक अत्यंत जटिल और विशेष सर्जरी मानी जाती है। योगेश के पिता पूरन चंद ने भावुक होते हुए कहा कि भले ही उनका बेटा अब उनके बीच नहीं है, लेकिन उनके अंगों के माध्यम से वह आज भी जीवित है और दूसरों की मदद कर रहा है।

मानवता की मिसाल बना फैसला

पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने इस निर्णय की सराहना करते हुए इसे मानवता की बड़ी मिसाल बताया है। डॉक्टरों का मानना है कि मृतक अंगदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि एक अंगदाता कई गंभीर मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकता है। योगेश कुमार का यह अंतिम फैसला न केवल तीन परिवारों के लिए जीवन का प्रतीक बन गया, बल्कि समाज को यह भी संदेश दिया कि अंगदान किसी के जाने के बाद भी उसे अमर बना देता है। पीजीआई प्रशासन ने मृतक के परिजनों का आभार व्यक्त करते हुए इस कठिन दौर में उनके साहस और उदारता को नमन किया है।