रांची। जेएसएससी सीजीएल नियुक्ति रद्द करने की सरकार की घोषणा के बाद अब इसके कानूनी प्रभाव और नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर बहस शुरू हो गई है। एक ओर प्रभावित अभ्यर्थी फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर परीक्षा में कथित गड़बड़ी की पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पूरी नियुक्ति रद्द करना जरूरी हो गया था।
सरकार का फैसला एकपक्षीय: अधिवक्ता विनोद सिंह
हाई कोर्ट के अधिवक्ता विनोद सिंह ने सरकार के फैसले को एकपक्षीय बताते हुए कहा कि बिना निष्पक्ष जांच और प्रभावित कर्मियों को सुनवाई का अवसर दिए नौकरी समाप्त करने का निर्णय नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति मेरिट के आधार पर हुई थी और हाई कोर्ट के आदेश के बाद परीक्षा परिणाम जारी कर नियुक्तियां की गई थीं। ऐसे में कुछ अभ्यर्थियों की कथित गड़बड़ी के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नौकरी से हटाना उचित नहीं है।
उनके अनुसार, सरकार के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
सरकारी आदेश के बाद दाखिल होगी याचिका
सरकार की घोषणा के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने कानूनी सलाह लेना शुरू कर दिया है। संबंधित अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से परीक्षा रद्द करने से संबंधित आधिकारिक आदेश या संकल्प जारी नहीं होता, तब तक उसके आधार पर याचिका दाखिल करना मुश्किल होगा।
सरकारी आदेश में सीजीएल परीक्षा रद्द करने के कारण और उसका कानूनी आधार स्पष्ट होगा। इसी के आधार पर प्रभावित अभ्यर्थी आगे की कानूनी रणनीति तय करेंगे।
अभ्यर्थियों का तर्क है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही सीजीएल का परिणाम जारी कर उनकी नियुक्ति सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर की गई थी। ऐसे में नियुक्ति रद्द करने के फैसले को लेकर अदालत के आदेश की अवहेलना से जुड़े सवाल भी उठाए जा रहे हैं।
फैसला उत्साहवर्धक: अधिवक्ता अजीत कुमार
वहीं, जेएसएससी सीजीएल में पेपर लीक के आरोपों को लेकर हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में पैरवी करने वाले वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने सरकार के फैसले को उत्साहवर्धक बताया।
उन्होंने कहा कि मामले की जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य सामने आए हैं। हाल के दिनों में सीआईडी जांच में भी कई नए तथ्य सामने आए हैं। ऐसे में दागी और गैर-दागी अभ्यर्थियों को अलग-अलग करना मुश्किल हो जाता है।उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को निरस्त करना ही उचित कदम रह जाता है।
अब आधिकारिक आदेश पर टिकी नजर
फिलहाल जेएसएससी सीजीएल नियुक्ति रद्द किए जाने के फैसले के बाद प्रभावित कर्मचारियों के सामने कानूनी चुनौती का रास्ता खुला है। अब सबकी नजर सरकार के विस्तृत आदेश या संकल्प पर है। उसमें परीक्षा रद्द करने के आधार स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि मामला हाई कोर्ट में किस तरह आगे बढ़ेगा।


