शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्य प्रदेश में लीलाधर श्री कृष्ण के उपदेशों का पाठ जन्माष्टमी पर स्कूली छात्र-छात्राओं को पढ़ाया जाएगा। लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए हैं। तो दूसरी ओर मामले पर धर्म की सियासत भी सर चढ़कर बोल रही है। हिंदू पक्ष ने मामले पर कहा कि जगतगुरु से परहेज नहीं करना चाहिए। सालों तक हमने अकबर, हिमायू, बाबर का गलत इतिहास पढ़ाया और पढ़ा। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यह सरकार का दोगलापन है। अकबर से परहेज करते हैं और ताजमहल की कमाई खाते हैं। देश संविधान से चलता है, जिसमें हजरत और कृष्ण में अंतर क्यों।
अखिल भारतीय साधु संत सन्यासी परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष अनिलानंद जी महाराज ने सरकार के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अब तक हमें बाबर, औरंगजेब और हुमायूं की लीलाएं पढ़ाई जा रही थीं। जब गलत इतिहास पढ़ाया गया तो अब सही इतिहास पढ़ाया जा रहा है तो इसमें दिक्कत क्या है। किसी को पूजा करने के लिए नहीं कहा जा रहा है। कृष्ण के दर्शन, उनके उपदेश और उद्देश्य को पूरे संसार ने माना है। उन्हें जगतगुरु के रूप में पढ़ाया जा रहा है, इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। जो लोग विवाद कर रहे हैं, वे अपनी सात पीढ़ी उठाकर देख लें, वे भी कहीं न कहीं भगवान कृष्ण के सामने हाथ जोड़े खड़े दिखाई देंगे।
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कृष्ण ही क्यों, हजरत मोहम्मद क्यों नहीं – मुस्लिम
ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि कृष्ण ही क्यों, हजरत मोहम्मद क्यों नहीं। अगर पढ़ाना ही है तो सभी धर्मों का आदर करना चाहिए। एक ही धर्म के लिए क्यों पढ़ाया जाए। अगर गीता पढ़ा रहे हैं तो कुरान और बाइबिल भी पढ़ाई जानी चाहिए। शमशुल हसन ने कहा कि बाबर, अकबर, हुमायूं और औरंगजेब को आप ही जिंदा रखे हुए हैं। मुसलमान तो मरने के बाद उन्हें याद नहीं रखता। मुगलों की बनाई इमारतों, आगरा के ताजमहल और राष्ट्रपति भवन से सरकार आज भी पैसे कमा रही है। मुगल आपको इतने पसंद हैं तो हम क्या करें। हम तो बस इतना चाहते हैं जो भी हो, समानता के साथ हो, किसी के साथ पक्षपात और भेदभाव न हो।
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